काबुल की फतह …. मौसम सरमा आहिस्ता आहिस्ता ख़त्म होने लगा। सर्दी भी बूढी हो गयी। नरम गर्म दिन होने लगे मुस्लमान सर्दी गुज़रने का ही इंतज़ार कर रहे थे अब उन्होंने हमला की तैयारी शुरू की ३५ हिजरी शुरू हो गया था। मुहासरा को एक अरसा गुज़र गया था इसलिए क़िला वाले भी तंग आगये थे वह चाहते थे की क़िस्मत का फैसला जल्द से जल्द हो जाये राजा भी तंग हो गया था। उसे यह ख्याल नहीं था की मुस्लमान काबुल के सख्त सर्दी बर्दाश्त करते हुए मुहासरा किये पड़े रहेंगे वह समझ रहा था की जब सख्त…
Author: umeemasumaiyyafuzail
शरारत……. इस दूसरे लोगो से भी काबुल वालो ही को हार हुई। उनके सिपाहियों की भारी तादाद मैदान जंग में खेत रही हज़ारो ज़ख़्मी हो गए हज़ारो मुसलमानो का दबाओ पड़ने से इधर उधर भाग गए और राजा के कैंप में जिस क़द्र सामान और दौलत थी सब मुसलमानो के हाथ लगा मुसलमानो को इस फतह से बड़ी ख़ुशी हुई। क़िला कुछ ऐसे मुक़ाम पर और ऐसा वाक़्या हुआ था की उसका मुहासरा दुश्वार था फिर भी अब्दुर्रहमान ने तीन तरफ से उसका मुहासरा कर लिया उस ज़माना में यह क़िला लंगड़ा क़िला कहलाता था काबुल वाले महसूर…
दूसरा हमला …… कई रोज़ में जाकर इल्यास इस क़ाबिल हुए कि उनकी ज़िन्दगी की उम्मीद हो चली। इस अरसा में अम्मी ,फातिमा (बिमला) कमला और राबिआ ने उनकी तीमारदारी में दिन रात एक कर दिए। खास कर राबिआ सारा सारा दिन और सारी सारी रात जगती रही। सबसे ज़्यादा तीमारदारी उसने की उसने अम्मी को रात को जागने नहीं दिया सब कुछ करती रही। अबू तय्यब ने भी बड़ी कोशिश और जा निशानी से इलाज किया। लीडर अबुर्रहमान भी क़रीब क़रीब रोज़ ही अयादत के लिए आते रहे। इल्यास तो सब ही के मश्कूर थे लेकिन राबिआ के खास…
सेहर हुस्न …… इल्यास के काफी गहरा ज़ख्म आया था। लेकिन वह बेहोश नहीं हुए थे अलबत्ता तकलीफ इतनी थी कि वह बेचैन थे उनके ज़ख़्मी शाने से खून का फवारा उबल रहा था। एक मुजाहिद ने खून बंद करने के लिए ज़ख्म मिला कर अमामा की पट्टी ज़ोर से कस दी इस तदबीर से खून निकलना बिलकुल बंद तो नहीं हुआ लेकिन बड़ी हद तक कमी हो गयी। इल्यास को सख्त तकलीफ थी लेकिन उन्होंने फिर भी अपनी क़रीब वालो से दुश्मनो का पीछा करने को बोला। उनसे लोगो ने कह दिया अमीर ने पीछा करने को मना…
जंग का आगाज़ …… जिस रोज़ राजा को चरवाहे से राजकुमारी का हाल मालूम हुआ उसके दूसरे रोज़ इस्लामी लश्कर काबुल के सामने आ धमका। मुसलमानो ने पहाड़ी पर जो ऊँचा नीचा था खेमे लगाए। राजा ने क़रीब के ब्रिज में बैठ कर उनकी तादाद का अंदाज़ा किया मुसलमान आठ हज़ार से भी कम रह गए थे। कुछ तो शहीद हो गए थे। कुछ उन क़िला में छोड़ दिए गए थे जिन्हे फतह किया था। इस वक़्त अब्दुर्रहमान के अलम के निचे मुश्किल से सात हज़ार मुजाहिदीन थे। राजा ने आठ दस हज़ार का अन्दाज़ा किया। उसके…
तलाश ….. महारजा काबुल के पास अगरचे जाबुल के हाकिम का खत मदद के लिए आगया था। मगर वह समझता था कि जाबुल के हाकिम के पास काफी फ़ौज है। मुसलमान उसे ज़ेर न कर सकेंगे इसलिए उसने मदद नहीं भेजी थी। वह इस फ़िक्र में था की जब जाबुल से दुबारा मदद की दरख्वास्त आएगी तब वह मदद देगा उसे ख्वाब में भी यह ख्याल था कि मुस्लमान आसानी से जाबुल की…
मिलाप…… सुगमित्रा कमला के साथ कभी तैयार न होती अगर उसे राजकुमार पिशावर से नफरत न होती और महाराजा ज़बरदस्ती उसके साथ शादी करने पर तैयार न हो जाते औरत में एक खूबी यह भी है की वह जिससे नफरत करती है उसके साथ रहने से मौत को अच्छा समझती है। सुगमित्रा को यह भी मालूम न था की कमला ने उसके जाने का क्या…
बदहवासी……. काबुल का क़िला से बाहर जो गार था। इस पर मेला लगता था। यह मेला इस ज़माने से शुरू हुआ था जबकि तुर्को ने अपनी सल्तनत की बुनियाद रखी थी। बररह मगीन पहला वह शख्स था जो तिब्बत से आकर इस गार में छुप गया था। और जिसकी बाबत लिखने वालो ने लिखा है की वह इंसानो का गोश्त खाता रहा है। इस शख्स ने काबुल में तुर्को की सल्तनत की बुनियाद रखी थी। जिस तारिख को उसने सल्तनत की बुनियाद रखी उसी तारिख को हर साल वहा मेला भरने लगा। धीरे धीरे इस मेले ने…
जाबुल पर क़ब्ज़ा …… जाबुल के फरमा रवा को यह बात मालूम हो गयी की मुसलमानो ने बस्त भी फतह कर लिया और अब उसकी तरफ बढ़ रहे है। उसके पास काफी लश्कर था। फिर जो लोग दादर बस्त और खुद जाबुल के इलाक़ा से भाग भाग कर क़िला में आये थे। उसने उनमे से वहु जवानो और ताक़तवर अधेड़ उम्र के लोगो को भी छांट छांट कर फ़ौज में भर्ती कर लिया था। उसे टिड्डी…
मुलाक़ात। ….. मुहब्बत और औरत की मुहब्बत अजीब होती है। वह जिससे मुहब्बत करती है उसके लिए समुन्दर में छलांग लगाने ,आग में कूद पड़ने और पहाड़ से जस्त मारने पर तैयार हो जाती है। जो औरत जज़्बाती नहीं होती उसकी मुहब्बत पाक होती है। कमला भी ऐसी ही औरतो में थी। उसे इल्यास से मुहब्बत हो गयी थी। जब उसने देखा राबिआ जिसे सुगमित्रा समझ रही थी मंगेतर…
