सेहर हुस्न …… इल्यास के काफी गहरा ज़ख्म आया था। लेकिन वह बेहोश नहीं हुए थे अलबत्ता तकलीफ इतनी थी कि वह बेचैन थे उनके ज़ख़्मी शाने से खून का फवारा उबल रहा था। एक मुजाहिद ने खून बंद करने के लिए ज़ख्म मिला कर अमामा की पट्टी ज़ोर से कस दी इस तदबीर से खून निकलना बिलकुल बंद तो नहीं हुआ लेकिन बड़ी हद तक कमी हो गयी। इल्यास को सख्त तकलीफ थी लेकिन उन्होंने फिर भी अपनी क़रीब वालो से दुश्मनो का पीछा करने को बोला। उनसे लोगो ने कह दिया अमीर ने पीछा करने को मना…
Author: umeemasumaiyyafuzail
जंग का आगाज़ …… जिस रोज़ राजा को चरवाहे से राजकुमारी का हाल मालूम हुआ उसके दूसरे रोज़ इस्लामी लश्कर काबुल के सामने आ धमका। मुसलमानो ने पहाड़ी पर जो ऊँचा नीचा था खेमे लगाए। राजा ने क़रीब के ब्रिज में बैठ कर उनकी तादाद का अंदाज़ा किया मुसलमान आठ हज़ार से भी कम रह गए थे। कुछ तो शहीद हो गए थे। कुछ उन क़िला में छोड़ दिए गए थे जिन्हे फतह किया था। इस वक़्त अब्दुर्रहमान के अलम के निचे मुश्किल से सात हज़ार मुजाहिदीन थे। राजा ने आठ दस हज़ार का अन्दाज़ा किया। उसके पास जंग …
तलाश ….. महारजा काबुल के पास अगरचे जाबुल के हाकिम का खत मदद के लिए आगया था। मगर वह समझता था कि जाबुल के हाकिम के पास काफी फ़ौज है। मुसलमान उसे ज़ेर न कर सकेंगे इसलिए उसने मदद नहीं भेजी थी। वह इस फ़िक्र में था की जब जाबुल से दुबारा मदद की दरख्वास्त आएगी तब वह मदद देगा उसे ख्वाब में भी यह ख्याल था कि मुस्लमान आसानी से जाबुल की फतह कर…
मिलाप…… सुगमित्रा कमला के साथ कभी तैयार न होती अगर उसे राजकुमार पिशावर से नफरत न होती और महाराजा ज़बरदस्ती उसके साथ शादी करने पर तैयार न हो जाते औरत में एक खूबी यह भी है की वह जिससे नफरत करती है उसके साथ रहने से मौत को अच्छा समझती है। सुगमित्रा को यह भी मालूम न था की कमला ने उसके जाने का क्या इंतेज़ाम किया है।…
बदहवासी……. काबुल का क़िला से बाहर जो गार था। इस पर मेला लगता था। यह मेला इस ज़माने से शुरू हुआ था जबकि तुर्को ने अपनी सल्तनत की बुनियाद रखी थी। बररह मगीन पहला वह शख्स था जो तिब्बत से आकर इस गार में छुप गया था। और जिसकी बाबत लिखने वालो ने लिखा है की वह इंसानो का गोश्त खाता रहा है। इस शख्स ने काबुल में तुर्को की सल्तनत की बुनियाद रखी थी। जिस तारिख को उसने सल्तनत की बुनियाद रखी उसी तारिख को हर साल वहा मेला भरने लगा। धीरे धीरे इस मेले ने मज़हबी मेला…
जाबुल पर क़ब्ज़ा …… जाबुल के फरमा रवा को यह बात मालूम हो गयी की मुसलमानो ने बस्त भी फतह कर लिया और अब उसकी तरफ बढ़ रहे है। उसके पास काफी लश्कर था। फिर जो लोग दादर बस्त और खुद जाबुल के इलाक़ा से भाग भाग कर क़िला में आये थे। उसने उनमे से वहु जवानो और ताक़तवर अधेड़ उम्र के लोगो को भी छांट छांट कर फ़ौज में भर्ती कर लिया था। उसे टिड्डी लश्कर देख…
मुलाक़ात। ….. मुहब्बत और औरत की मुहब्बत अजीब होती है। वह जिससे मुहब्बत करती है उसके लिए समुन्दर में छलांग लगाने ,आग में कूद पड़ने और पहाड़ से जस्त मारने पर तैयार हो जाती है। जो औरत जज़्बाती नहीं होती उसकी मुहब्बत पाक होती है। कमला भी ऐसी ही औरतो में थी। उसे इल्यास से मुहब्बत हो गयी थी। जब उसने देखा राबिआ जिसे सुगमित्रा समझ रही थी मंगेतर…
बसत पर ग़लबा …. दादर के फतह हो जाने से इस नवाह का तमाम इलाक़ा काँप उठा। लोग बस्तिया छोड़ कर छोड़ कर बसत और जाबुल की तरफ भागने लगे। बसत वालो को भी उन भगोड़ो की ज़बानी दादर की फतह और मुसलमानो की पेश क़दमी का हामिल मालूम हो गया। बसत में एक छोटा सा क़िला था। वहा का क़िला दार जाबुल का मा तहत था। उसके…
राफे की रवानगी….. मगरिब की नमाज़ पढ़ कर राफे ,इल्यास और अम्मी तीनो ने खाना खाया। जब खाने से फारिग हो चुके तो राफे ने कहा ” महाराजा काबुल मेरा बड़ा पास व लिहाज़ करते है। बुद्धमत वालो का बड़ा लामा तो तिब्बत में होता है मगर मेरी क़द्र व मन्ज़िलत भी उसी के बराबर की जाती है। मैं कई बार काबुल जाकर राबिआ को देख चूका हु लेकिन उससे तन्हाई में मिलने का मौक़ा एक बार भी नहीं मिला।…
बाक़िया हैरतनाक हाल ….. असर की नमाज़ के बाद इल्यास और राफे दोनों फिर एक जगह जमा हुए अम्मी भी आगयी। राफे ने बाक़िया हाल इस तरह बयान करना शुरू किया। “आतिश परस्त बूढ़े ने कबिलियो की ज़बान और उनकी मज़हबी किताबे पढ़ने का जो मश्वरा दिया था। वह निहायत ही अच्छा रहा। इससे बड़ा फायदा पंहुचा। अगर हम उनकी ज़बान और उनकी किताबो से वाक़िफ़ न होते तो वहशी काबुली हमें ज़रूर क़त्ल कर डालते। यह भी अच्छा हुआ की हमने काबुल वालो जैसा लिबास पहन लिया। दरअसल जासूस के लिए यह ज़रूरी है की जिस क़ौम और…
