Author: umeemasumaiyyafuzail

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बसत पर ग़लबा ….                                                                    दादर के फतह हो जाने से इस नवाह का तमाम इलाक़ा काँप उठा। लोग बस्तिया छोड़ कर छोड़ कर बसत और जाबुल की तरफ भागने लगे। बसत वालो को भी उन भगोड़ो की ज़बानी दादर की फतह और मुसलमानो की पेश क़दमी का हामिल मालूम हो गया। बसत में एक छोटा सा क़िला था। वहा का क़िला दार जाबुल का मा  तहत था। उसके…

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 राफे की रवानगी…..                                              मगरिब की नमाज़ पढ़ कर राफे ,इल्यास और अम्मी तीनो ने खाना खाया। जब खाने से फारिग हो चुके तो राफे ने कहा ” महाराजा काबुल मेरा बड़ा पास व लिहाज़ करते है। बुद्धमत वालो का बड़ा लामा तो तिब्बत में होता है मगर मेरी क़द्र व मन्ज़िलत भी उसी के बराबर की जाती है। मैं कई बार काबुल जाकर राबिआ को देख चूका हु लेकिन उससे तन्हाई में मिलने का मौक़ा एक बार भी…

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बाक़िया हैरतनाक हाल …..                                                        असर की नमाज़  के बाद इल्यास और राफे दोनों फिर एक जगह जमा हुए  अम्मी भी आगयी। राफे ने बाक़िया हाल  इस तरह बयान करना शुरू किया। “आतिश परस्त बूढ़े ने कबिलियो की ज़बान और उनकी मज़हबी किताबे पढ़ने का जो मश्वरा दिया था। वह निहायत ही अच्छा रहा। इससे बड़ा फायदा पंहुचा। अगर हम उनकी ज़बान और उनकी किताबो से वाक़िफ़ न होते तो वहशी काबुली हमें ज़रूर…

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    राफे की दास्तान …. इल्यास ज़ुहर की नमाज़ पढ़ कर कैंप में वापस आये। उनकी अम्मी और राफे भी नमाज़ पढ़ चुके थे।  इल्यास ने अपने चाचा से कहा ” माफ़ करना ,मैं लड़ाई का शोर सुन कर ज़ब्त न कर सका।  चला गया। राफे : मेरे भोले बहादुर भतीजा यह बे अदबी नहीं जोश इस्लाम और शौक़ शहादत तुम्हे खींच कर ले गया। अगर तुम न जाते या हिचकिचाते तो मैं तुम्हे बुज़दिल समझता। तुम खींचे चले गए मुझे बड़ी ख़ुशी हुई  मुसलमान के दिल में जोश जिहाद और शौक़ शहादत नहीं उसका…

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 बोद्ध ज़ोर का हश्र ….    जब मुसलमानो  का दादर पर क़ब्ज़ा पूरी तरह से हो गया तो सुबह सादिक़ हुई। कई मुसलमानो ने मिल कर  अज़ान दी। यह पाहि सदाए तौहीद थी जो दादर के क़िला में बुलंद हुई मुसलमानो ने वज़ू किये और खुले मैदान में नमाज़ की तैयारी करने लगे। उन्हें यह  खौफ भी न हुआ की वह काफिरो के क़िला में है। चंद ही घंटे हुए की उन्होंने क़िला फतह कर लिया। कही कुफ्फार नमाज़ की हालत में उन पर हमला न कर दे। उन्होंने जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ी। काफिरो को अपने घरो…

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  दादर की फतह…..        हम्माद राफे जैसे वह पेशवा समझ रहे थे और इल्यास के कहने से चले। उन्होंने अपने दस्ता को बुलाया और उन्हें यह  समझा कर की दुश्मन शब् खून मारने वाला है मुसलमानो को होशियार कर दो। उन्हें तमाम सिम्तो पर भेज दिया। और खुद लीडर के खेमा की तरफ चले। उन मुहाफ़िज़ दस्तो ने सेंट्रो में जाते ही नींद से बेदार हो कर जिहाद के लिए आओ के नारे लगाए और जब उन्होंने देखा की मुस्लमान कलबलाने लगे है तो होशियार के नारे इतनी ऊँची आवाज़ से लगाए जो कैंप  से बाहर न…

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    इंकेशाफ राज़ ( राज़ का ज़ाहिर होना )           मुस्लमान असर के टाइम लौट कर अपने कैंप पर पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने असर की नमाज़ पढ़ी और कुछ देर आराम किया। मगरिब की अज़ान होने पर जमात के  साथ नमाज़ पढ़ी और अलाव जला कर खाने का इंतेज़ाम करने लगे। इस इस्लामी लश्कर के साथ कुछ गुलाम भी थे। वह लकड़िया काट लाये जो रात भर जलाई जाते। शुरू रात से जो अलाव रोशन होते तो सुबह तक रोशन रहते। खाना खा कर मुसलमानो ने ईशा की नमाज़ पढ़ी और सो रहे।…

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 पुरजोश हमला ……        जब वह दरबार से निकल कर थोड़ी दूर चले उन्होंने पेशवा की सवारी आती देखी। उस  पेशवा की जिसने इल्यास को क़ैद कर दिया था। उसकी सवारी के आगे सवारों का एक दस्ता था। दस्ता के पीछे धार के पुजारी थे। उनके पीछे पेशवा था। पेशवा के पीछे सवार थे। हम्माद इल्यास और उनके साथी सड़क के किनारे पर खड़े हो गए जब सवारी उनके सामने आयी तो पेशवा  ने इल्यास को गौर से देखा उसने सवारी रुकवाई  और इल्यास को आगे  आने का इशारा किया। वह उसके पास जाकर खड़े हुए। पेशवा ने…

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 सुलह का पैग़ाम …..  दादर वालो को यह मालूम हो गया था की इस मुल्क पर मुसलमानो ने लश्कर कशी कर दी है। और अर्जनज तक का इलाक़ा फतह कर लिया है। उन्होंने यह भी सुन लिया की अर्जनज (जगह का नाम ) का हुक्मरान महारानी और राजकुमारी के साथ मुस्लमान हो गया है। उन्हें उसके मुस्लमान होने का बड़ा ताज्जुब हुआ था उस नवाह में यह मशहूर था की अर्जनज का हुक्मरान अपने मज़हब में बड़ा पक्का और बहुत मज़बूत है। साथ ही उन्होंने यह भी सुना की इस्लामी लश्कर बढ़ा चला आ रहा…

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 बिमला आगोश इस्लाम में ……  यह दोनों ईशा के टाइम लश्कर में पहुंचे उस वक़्त अज़ान हो रही थी बिमला ने कहा ” कहा चले गए थे बेटा ” इल्यास : मैं अपनी बहन के पास गया था। बिमला : अच्छा ,बहन को साथ ही लाये हो। देखु तो। उसने बढ़ कर कमला को देखा। शायद उसे पहचान लिया ” अच्छा बी कमला है। तुमने तो मुझे न पहचाना होगा। कमला : मैंने देखा ज़रूर है। बिमला : मैं तुम्हे अच्छी तरह जानती हु। तुम्हारे पिता तो अच्छी तरह है। कमला : अच्छी तरह है। इसी…

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