Author: umeemasumaiyyafuzail

At NovelKiStories786.com, we believe that every story has a soul and every reader deserves a journey. We are a dedicated platform committed to bringing you the finest collection of novels, short stories, and literary gems from diverse genres.

Lagan part 8… “आपको और कुछ चाहिए?” उसने जाने से पहले पूछा। “चाहिए।” आफ़ाक़ ने गंभीर आवाज़ में कहा। वह सिर से पाँव तक जैसे इंतज़ार बनकर खड़ी रह गई। “पहले चाय बनाइए।” फलकी ने हमेशा की तरह उसके प्याले में चाय बनाकर सामने रख दी। “एक प्याली और बनाइए।” फलकी ने दूसरी प्याली भी बना दी। “वहाँ कुर्सी पर बैठकर यह चाय पी लीजिए।” वह कुर्सी पर बैठकर चाय पीने लगी। अब तक फलकी समझ चुकी थी कि उसके सामने बहस या आनाकानी नहीं करनी चाहिए। उसकी भलाई इसी में थी कि एक रोबोट की तरह उसकी हर…

Read More

“अब क्या होगा…?” “अब क्या होगा…?” वह घबराकर बार-बार यही सोच रही थी। वह झाड़न से अपने हाथ पोंछती हुई रसोई में आई। तभी आफ़ाक भी उसके पीछे-पीछे अंदर आ गए। चूल्हे पर रखी देगची तेज़ आँच पर चढ़ी हुई थी और उसके किनारों से भाप निकल रही थी। “खाना तैयार हो गया?” आफ़ाक ने पूछा। “जी… नहीं।” फ़लकी ने नज़रें झुकाकर कहा। “असल में सफ़ाई करते-करते…” “अच्छा…” आफ़ाक मुस्कराते हुए बोले, “मैंने सोचा कि आज दोपहर का खाना घर आकर ही खा लिया जाए।” फिर वह आगे बढ़े, देगची का ढक्कन उठाकर अंदर देखा और बोले, “लगता है अभी सालन बनने के कोई…

Read More

Lagan part 6…. खूबसूरत चेहरा जलकर इतना बदसूरत हो जाएगा कि लोग उसे देखना भी पसंद नहीं करेंगे। तौबा… तौबा… उसका इरादा बदल जाता। “तो फिर आसान और आरामदायक तरीका कौन-सा होगा? कोई गोली खा ली जाए?” इस घर में तो उसे कोई दवा भी नज़र नहीं आती थी। आए दिन वह फिल्मों की अभिनेत्रियों के बारे में सुनती थी कि वे नींद की गोलियाँ खा लेती हैं। फिर उन्हें अस्पताल भी पहुँचा दिया जाता था और वे बच भी जाती थीं। उसे भी कुछ ऐसा ही इंतज़ाम पसंद था। असल में वह आफ़ाक़ को धमकाना चाहती थी—ऐसा कि साँप…

Read More

बेहद ख़तरनाक क़दम है। फिर उसे कई ग़रीब लोगों का ख़याल आया। फ़क़ीरों की याद आई। जब भी उसकी कार बाज़ार में जाकर रुकती, कई फ़क़ीर और बच्चे हाथ फैला कर कहते— “रात से भूखा हूँ, रोटी खिला दो!” अगरचे वह पैसे दे देती, मगर दिल में सोचती— उन्हें खाने की क्या ज़रूरत है? ये सूखी हड्डियाँ और काली चमड़ी… खाने-पीने से क्या फ़ायदा? अगर ये लोग न भी खाएँ तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा? अगर ग़रीब ज़िंदा भी रहें तो कौन-सी कमी हो जाएगी? अगर लोगों के पास रोटी नहीं है तो इसमें मेरी क्या गलती? फिर क्या ये ज़रूरी…

Read More

Part 4 मम्मी के यहाँ तो इस शख़्स ने शोर मचाया हुआ था कि डिनर पर जाता है, और यहाँ सब कुछ भूल गया था। उस वक्त शायद आठ बजे रहे थे। फलक़ी ने फिर से अपनी घड़ी देखी, तो आफ़ाक़ उसकी तरफ़ देख कर बोला— “फलक़, तुम तैयार हो जाओ, हमें आठ बजे एक डिनर पर जाना है। कोई बात नहीं, मैं इन लोगों को फोन कर देता हूँ कि हम साढ़े आठ बजे तक पहुँच जाएंगे और रिज़वान और भाई भी हमारे साथ ही जाएंगे।” “नहीं यार, तुम लोग पहुँच जाओ, हम अब जाते हैं।” “वो जगह…

Read More

Falki ki khamoshi …. फ़लकी का दिल चाहा कि झटके से अपना बाज़ू छुड़ा ले, मगर फिर उसे रात वाली बेबसी का ख़याल आ गया। वह चुपचाप अलग हो गई। “भला रोने की क्या बात है, चाँद!” अम्मी अपनी साड़ी सँभालती हुई सोफ़े पर बैठ गईं। “इकलौती बेटी है, पहली बार अलग हुई है। आख़िर कोई ना कोई एहसास आ ही जाता है!” आफ़ाक़ ने हँसते हुए कहा। “रुख़सती के वक़्त तो आपने इसे रोने नहीं दिया। अब आपको देखते ही थोड़ी एक्साइटेड हो गई है!” आफ़ाक़ ने इतनी खूबसूरती से यह बात कही कि सबको सच लगने लगा। सिर्फ़ एक फ़लकी थी, जो अंदर ही…

Read More

Lagan part 2 घर में शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं। कार्ड बाँटे जा चुके थे। खाने की सूची तैयार हो गई थी। हर रोज़ घर में व्यवस्थापकों की एक टोली आती, जिन्हें डैडी सारी व्यवस्थाओं के बारे में हिदायतें देते। पूरे घर में नया पेंट हो गया था, ऐसा लग रहा था जैसे घर की भी शादी हो और उसे दुल्हन की तरह सजाया जा रहा हो। और तो और, थी भी अपने सारे काम छोड़कर शादी की तैयारियों में लगी रहतीं। ज्यादा से ज्यादा यह होता कि उनकी सारी सहेलियाँ सुबह आ जातीं और घर में एक कॉफी पार्टी…

Read More

आफ़ाक़ आज सोची समझी स्कीम  के तहत दफ्तर देर से  था बल्कि पिछले एक हफ्ते से उसने आने के वक़्त में हैरत  अंगेज़ तब्दीलिया कर ली थी। कभी बहुत जल्दी ,और कभी बहुत देर से अचानक दफ्तर में ऐसे दाखिल होता जैसे छापा मारने की गरज़ से आया हो। सारे दफ्तर के लोग इस बेहवियर से  हैरान थे क्युकि सब जानते थे कि आफ़ाक़ वक़्त की पाबन्दी का सख्ती से क़ाएल था। दुसरो को इस उसूल पर लाने के लिए वह हमेशा दफ्तर खुलने से १५,२० मिंट पहले आजाता था। कभी सड़क पर टहलता रहता और कभी मोटर में बैठ…

Read More

“चौदहवीं चोटी” भाग 1 और 23 अक्टूबर 2005 वह भूकंप प्रभावित लोगों को इंजेक्शन लगा रही थी। “फराह, तुम इस्लामाबाद वापस जा रही हो, तुम चलोगी या यहीं और रुकना चाहोगी?” “अगर तुम जा रही हो तो मैं भी चलती हूँ। तुम हवाई मार्ग से जा रही हो?” “हाँ, अभी बशीर आकर बताएगा कि हेलीकॉप्टर खाली है या नहीं।” इसी दौरान एक कैप्टन अंदर आया, “मैडम, हेलीकॉप्टर बस आने ही वाला है। कर्नल तारिक उसमें कुछ लोगों को लेकर आ रहे हैं।” “वे बस आते ही होंगे।” वह झुककर एक बच्चे को इंजेक्शन लगा रही थी, फिर चिंतित होकर उसकी…

Read More

करनल फारुक तो चले गए परेशे को लगा उसने गलत सुना कहाँ चले गए? वापस सकर्दू जैसे पूरा ग्लेशियर उसके सिर पर फट पड़ा, वह रेडियो को कंग से देख रही थी वह कैसे चले गए? उन्होंने तो हमें रेस्क्यू करना था, उससे शब्द निकल नहीं पा रहे थे, जैसे सारी ताकत छीन ली गई हो वह कह रहे थे मौसम खराब है और भी कोई समस्या आ सकती है, डोन्ट नो, सुबह ही चले गए तब परेशे को अहसास हुआ, वह खुले आसमान के नीचे अकेली बेबस पड़ी है अहमद, वह कैसे जा सकते हैं? हमने उनके…

Read More