सुलह से इंकार …… इस्लामी लश्कर कोच व क़याम करता ईरान को तय करके सीतान की तरफ बढ़ा। अगरचे सिर्फ आठ हज़ार मुस्लमान थे और एक ऐसे मुल्क की तरफ बढ़ रहे थे जो ऐसे बर्रे आज़म से मिला हुआ था जिसकी आबादी करोड़ो की तादाद में थी। पहले तो खुद काबुल ही बे शुमार फौजे उनके मुक़ाबला में ला सकता था। फिर हिंदुस्तान और उसके राजा महाराजा तो टिड्डी विल लश्कर भेज सकते थे। लेकिन मुस्लमान डरा नहीं करता और फिर मुजाहिद उसके पेश नज़्ज़ार तो सिर्फ जिहाद रहता है वह इस…
Author: umeemasumaiyyafuzail
लश्कर इस्लाम का कोच अब्दुल्ला बिन आमिर ने सलेही को अमीर उल मूमिनीन की खिदमत में रवाना किया। इलियास और उनकी अम्मी दोनों दुआएं मांगते थे की खलीफा मुस्लिमीन लश्कर कशी की इजाज़त दे दे। सबसे ज़्यदा बेचैनी के साथ वही दोनों उनकी वापसी का इंतज़ार कर रहे थे। आखिर सलेही वापस आगये। अमीर उल मूमिनीन हज़रत उस्मान गनी खलीफा सोएम ने अब्दुल्लाह बिन आमिर को लिखा : “तुम काबुल से नज़दीक हो और मै दूर हु। तुमने जासूसों के ज़रिये के हालात मालूम कराये है। तुम मुझसे ज़्यदा सूरत हासिल से…
राज़ की कुंजी ,,,,,,,,, जासूसों का यह काफला तेज़ क़दमी से वापस लौटा। उन्होंने कश और ज़रनज का दरमियानी इलाक़ा बहुत जल्द तय कर लिया। सलेही तो चाहते थे की इत्मीनान और आराम से सफर करे लेकिन इल्यास की ख्वाहिश थी की या तो ज़मीन की तनाबे खींच जाये या उनके घोड़े के पर लग जाये और वह जल्द से जल्द बसरा पहुंच जाये। इस जल्दी की यह वजह थी की अब्दुल्लाह ने उन्हें बता दिया था सुगमित्रा की शादी अनक़रीब होने वाली है वह चाहते थे की अगर सुगमित्रा हक़ीक़त में राबिआ है …
काबुल का राजा……. दूसरे रोज़ सुबह की नमाज़ के बाद अब्दुल्लाह आये उन्होंने बैठते ही दरयाफ्त किया। “दादर के धार में गए थे ?” इल्यास ने जवाब दिया “मैं गया था ” उसके बाद उन्होंने तमाम हालात उनसे ब्यान किये। उन्होंने कहा। “तुमने सुगमित्रा को क़रीब से देखा है ?” इल्यास :इतने क़रीब से देखा है जैसे मैं और तुम बैठे है। अब्दुल्लाह :बड़े खुश नसीब हो। मैं ऐसे कई राजकुमारों को जानता हु जो उसके…
इल्यास की हैरत…….. जब सुबह हुई तो यह काफला दादर से दूर निकल गया था। लेकिन अब भी उन्हें तआक़ुब का अंदेशा था। कमला इस नवाह के रास्तो से बखूबी वाक़िफ़ थी। उसने राह छोड़ी और उन्हें लेकर एक गैर मारूफ रास्ता पर रवाना हुई। चुकी उन्होंने सीधा रास्ता छोड़ दिया इसलिए कई दिन में उस…
रिहाई……. दीना और इल्यास दोनों निहायत ख़ामोशी और एहतियात से कोठरी से निकले और दबे क़दमों चले। अभी तक दीना के नरम हाथ इल्यास का हाथ था। उसने उनके कान में कहा बिलकुल खामोश रहना न कुछ कहना पूछना। दीना हसीन वा नौजवान थी। इल्यास चाहते थे वह उनसे अलग रहे उन्होंने उसके हाथ में से अपना हाथ छुड़ाना चाहा उसने और दबा लिया और उनके मुँह के पास अपना मुँह लेजाकर कहा। “तुम्हारे हाथ में लाल नहीं है ?मै छीन लेंगे यूही चले चलो। …
इक़रार ,,,,,,,,,,,, जब सुगमित्रा चली गयी तो इल्यास तज़बज़ब में पड़ गए। वह सर झुकाये हुए थे फिर क़दमों की चाप हुई। उनहोंने नज़र उठा कर देखा। वही लड़की जो सुगमित्रा के पास वक़्त ख़त्म होने का पैगाम लायी थी। वो खाने की थाल लिए हुए थी। उसने थाल इल्यास के सामने रख दिया और कहा “सुगमित्रा ने तुम्हारे लिए खाना भेजा है। इल्यास :उनका बहुत बहुत शुक्रिया। मुझे अब भूक नहीं रही है। लड़की : उन्होंने कहा है के अगर आपने मेरी और कोई बात नहीं मानी तो यह ज़रूर मान लीजिये खाना खा लीजिये। इल्यास : यह…
गिरफ़्तारी …… इल्यास को ताज्जुब हुआ के पेशवा ने उन्हें क्यू रोका। वह एक तरफ खड़े हो कर गौर करने लगे। उनकी समझ में कुछ न आया। वह उन हसीन लड़कियों को रुखसत होता देखने लगे जो दुआ में शरीक हुई थी। वह सुगमित्रा को भी देखना चाहते थे। लेकिन डरते थे उसकी सूरत देखते ही उनके दिल पर तीर सा लगता था। जब आँखे टकरा जाती थी तो बिजली सी गिर पड़ती थी। …
हूरविष सुगमित्रा। …….. भी दादर पहुंच गया। दादर के तीन अएतराफ़ में पथ्हर चट्टानें फ़सील की तरह उठती चली गयी थी और सामने की दीवार मज़बूत बड़े बड़े पथ्तरों से बनाई गयी। चुकी और तरफ चट्टानें थी इसलिए उधर दरवाज़े नहीं थे। जो दीवार बनाई गयी थी उसमे तीन दरवाज़े थे। एक दरवाज़ा जो दरमियान में था वह इतना बड़ा था के हाथी उसमे गुज़र सकता था। और दरवाज़े जो इसके इधर उधर थे वह भी इतने बड़े थे के घोड़े…
हमदर्द नाज़नीन। …….. जब यह लोग दादर के क़रीब पहुंचे तो उन्होंने मशवरा किया के जो कपडे अब्दुल्लाह ने कबिलियो जैसे दिए है। वह बदल ले या अपना ही लिबास पहने रहे । सलेही ने कहा : अगर हम लिबास दब्दील कर भी ले तो अपनी सुरते नहीं बदल सकते इसलिए लिबास बदलना फ़ुज़ूल है। मसूद ने कहा : मेरे ख्याल में हमें दाढ़ी वालो को तो लिबास नहीं बदलना चाहिए लेकिन इल्यास बदल ले यह उनमे…
