Author: umeemasumaiyyafuzail

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peer-e-kamil part 5  “यह बेवकूफी भरा सुझाव असजद के अलावा किसी और का नहीं हो सकता। उसे इस बात का एहसास नहीं है कि मैं अभी पढ़ रही हूं।” इमामा ने अपनी भाभी से कहा. “नहीं, असजद या उसके परिवार ने ऐसी कोई मांग नहीं की। बाबा ख़ुद तुमसे शादी करना चाहते हैं।” इमामा की भाभी ने विनम्रता से जवाब दिया। “बाबा ने कहा…?” इमामा के चेहरे पर अविश्वास साफ झलक रहा था। “मुझे यकीन नहीं हो रहा… जब मैंने मेडिकल में एडमिशन लिया था, तब तो उन्हें काफी समय तक कुछ पता भी नहीं था। वो तो चाचा…

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peer e kamil part 4 लॉन का सीन — इमामा और वसीम की नोकझोंक वसीम ने दूर से देखा—इमामा लॉन में अकेली बैठी थी। उसके कानों पर हेडफोन थे और वह वॉकमैन पर कुछ सुनने में मग्न थी। वह चुपचाप पीछे से आया और अचानक— उसने हेडफोन के तार खींच लिए। इमामा ने बिजली-सी तेजी से वॉकमैन का स्टॉप बटन दबा दिया। “यहाँ अकेले बैठकर क्या सुन रही हो?” वसीम ने हँसते हुए हेडफोन अपने कानों पर लगाने की कोशिश की— लेकिन तब तक कैसेट बंद हो चुकी थी। इमामा झटके से खड़ी हुई, हेडफोन अपनी ओर खींचे और गुस्से…

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peer-e-kamil part 3  इमामा आपा आप लाहौर कब जायेंगे? उसने आश्चर्य से अपने नोट्स को देखा। उसने सिर उठाया और साद को देखा। उसने साइकिल की गति धीमी की और उसके चारों ओर चक्कर लगाने लगा। कल क्यों ? तुम क्यों पूछ रहे हो? इमामा ने अपनी फ़ाइल बंद करते हुए कहा। जब तुम चले जाओगे तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी। उसने कहा क्यों ? इमामा ने मुस्कुराते हुए पूछा. क्योंकि तुम मुझे बहुत अच्छे से लाड़-प्यार करते हो और मेरे लिए ढेर सारे खिलौने लाते हो और मुझे घुमाने ले जाते हो। और इसीलिए तुम मेरे साथ…

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peer-e-kamil part 2 फिलोमेना फ्रांसिस ने अपने हाथ में पैकेट टेबल पर रखा और हॉल के चारों ओर देखा, पेपर शुरू होने में अभी भी दस मिनट बाकी थे, और हॉल में छात्र किताबें, नोट्स और नोटबुक पकड़े हुए थे, जल्दी से पन्ने पलट रहे थे। इम्तिहान का हॉल — सालार का आत्मविश्वास वह उन पर आख़िरी नज़र डाल रहा था। उसकी हर हरकत उसके भीतर छिपी बेचैनी और घबराहट को साफ़ जाहिर कर रही थी। फिलोमेना के लिए यह कोई नया मंजर नहीं था—वह इससे पहले भी कई बार ऐसा देख चुकी थी। तभी उसकी नज़र हॉल के…

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“ज़िंदगी में मेरी सबसे बड़ी इच्छा…?”बॉलपॉइंट को होंठों से दबाते हुए वह कुछ पल के लिए गहरी सोच में डूब गई। फिर एक लंबी साँस ली और बेबस सी मुस्कुरा दी। इस सवाल का जवाब देना काफी पेचीदा है… “ऐसा क्यों? इतना मुश्किल क्या है इसमें?”जावेरिया ने हैरानी से पूछा। क्योंकि मेरी बहुत सारी इच्छाएं हैं और हर इच्छा मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उसने सिर हिलाते हुए कहा वे दोनों सभागार के पीछे दीवार के सहारे ज़मीन पर झुके हुए थे आज एफएससी कक्षाओं में उनका आठवां दिन था और उस समय वे दोनों अपने खाली समय में सभागार…

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“برہان تم اچھے انسان ہو، اپنے اندر کی برائی کو اچھائی پر حاوی نہ ہونے دو۔ تم اب بھی وہی برہان بن سکتے ہو جو تم پہلے تھے، ہم دوبارہ دوست بن سکتے ہیں، اگرچہ یہ بہت مشکل ہے، لیکن…”                                                                                                            شاہ نے اس کے کندھے پر ہاتھ…

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“ازلان تم اتنی صبح کہاں سے آ رہے ہو؟”                                                                                                                                        شمائلہ حیرت سے ساکت رہ گئی۔                                    …

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  ’’کیا تمہارے گھر میں پانی دینے کا رواج نہیں؟‘‘                                                                                                  ازلان نے شاہ کی طرف دیکھتے ہوئے قدرے سنجیدگی سے کہا،                                                               …

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“تم کب آئے ہو؟” مہر نے اسے بیٹھنے کا اشارہ کرتے ہوئے کہا۔ “میں رات کو آیا تھا۔ میں آپ سے ملنا چاہتا تھا لیکن عافیہ بھابھی نے کہا کہ صبح ملنا۔ شاید آپ سو رہی تھیں۔” حریمہ کو اسے دیکھ کر دکھ ہوا۔ مہر نے اثبات میں سر ہلایا۔ ’’تمہاری بھابھی عافیہ کہہ رہی تھی کہ میری شادی جمعہ کو ہے؟‘‘ حریمہ نے اس کا دھیان بٹانے کی کوشش کی۔ “ہاں۔ شاہ نے تمہارا شاہ ویز سے رشتہ طے کر لیا ہے۔ کوئی اعتراض ہو تو بتاؤ؟” مہر اسے دیکھتے ہوئے بولی تھی۔   “نہیں… میں بھلا کیوں اعتراض…

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  “شاہ کیا ہوا؟”                                                                                                                             مہر نے بے چینی سے اسے دیکھتے ہوئے کہا،                                                   …

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