शज़ा—शज़ा—कहाँ हो तुम-? दादू नीचे बुला रही हैं- जिब्रईल धम से दरवाजा खोलकर उसके कमरे में आया- वह जो…
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عبداللہ और परी ने जाकर सलाम किया। “बैठ जाओ,” उन्होंने हुक्म दिया। वे दोनों घुटनों के बल बैठ…
वे शिष्टता से अंदर प्रवेश किए। आगे-पीछे दो कमरे थे। फर्श पर चटाई बिछी थी और बाबा जी दीवार…
शज़ा बेटा, उठ जाओ, शाम हो गई है। शमा ने प्यार से उसके बालों को समेटते हुए उसे…
परी सर्दी बहुत ज़्यादा हो गयी है। हमें कॉलेज से छुट्टियाँ हो रही हैं और… अब मैं… वह झिझका।…
रात के तीन बज रहे थे। वह इशा की नमाज के बाद से ही जानमाज़ पर बैठी थी।…
