तिजारत। …… थोड़ी देर के बाद अब्दुल्लाह आये। उन्होंने इल्यास से मुखतिब हो कर कहा “मैंने पहचान लिया .औरत वही है जो राबिया को लायी थी। इल्यास खुश हो गए। उन्होंने कहा “खुदा का शुक्र है। यक़ीनी है के अब राबिया का पता चल जायेगा। अब्दुलाह :मुझे खौफ है के शायद अभी हमें कामयाबी न होगी। इल्यास : क्यू ?…
Author: umeemasumaiyyafuzail
सुराग रसी……… हिंदी का नाम अब्दुल्लाह रखा गया। अब्दुल्लाह ने कहा। “अगर मैं इस बात को ज़ाहिर न करू के मैं मुस्लमान हो गया हु तो कोई हर्ज तो नहीं। सलेही :कोई हर्ज नहीं है। अब्दुल्लाह :मैं इसलिए अभी ज़ाहिर नहीं करना चाहता के यहाँ के लोग सब बुध मज़हब के पेरू और मुसलमानो के खिलाफ है। मैं ऐसे बहुत से लोगो से वाक़िफ़ हु जो किसी अच्छे मज़हब की तलाश है। मैं कोशिश करूँगा के वह भी मुस्लमान हो जाये। अगर वह मुस्लमान हो गए तो यहाँ का हुक्मरा भी मुस्लमान…
तब्लीग इस्लाम,,,,,,, इन लोगो ने रात निहायत आराम से बसर की। सुबह को नमाज़ पढ़ कर तिलावत करने लगे। इल्यास निहायत खुश थे। एक तो क़ुरान की निहायत ही शीरें ज़बान है। दूसरे इल्यास का लहजा बड़ा ही प्यारा था। सुनने वालो को वजद आजाता था। जिस वक़्त वह कर रहे थे वही हिंदी जो ज़रनज का सिपह सालार था आगया। उनके क़रीब बैठ कर सुनने लगा। जब उन्होंने तिलवात ख़त्म की तो ” कैसा है यह क्या है? इल्यास : यह वह मुक़द्दस किताब है जो परवरदिगार आलम ने अपने मुहतरम रसूल खुदा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल अल्लाह…
एक हमदर्द ,,,,,,,,, मुसलमानो को इस बात का बहुत अफ़सोस हुआ के शहर ज़रनज के मर्ज़बान ने उनकी मदारत करना तो दरकार उन्हें अपने शहर में रात बसर करने की भी इजाज़त न दी। वह इस बात को समझ गए के उसे मुसलमानो से क़ल्बी अदावत है। इस बात का सुराख़ लगाने का मौक़ा न मिल सका के वह मुसलमानो से लड़ाई की तैयारी तो नहीं कर रहा है। रात उन्होंने मैदान में जाकर बसर की और सुबह होते ही वहा से कश की तरफ चल पड़े। अब वह उस इलाक़े में सफर कर रहे थे जो बिलाद हिन्द…
मर्ज़बान की अदावत,,,,,,,, जासूसों का काफला जो सौदागरों के भेस में काबुल रवाना हुआ था। चार आदमीओ पर मुश्तमिल था। उनके नाम यह है :सालेही ,अब्बास ,मसूद और इल्यास। इनमे सलेही मेरा काफला थे। इस क़ाफ़ले में सबसे कमसिन इल्यास थे। चुके पहाड़ी इलाक़े में सफर करने का ख्याल था इसलिए ऊँट साथ ले गए थे घोड़ो पर ही सामान तेजारत बार किया गया और घोड़ो पर ही यह लोग सवार हुए। इन लोगो ने अपना मख़सूस अरबी…
जासूसों का काफला। ………
गुमशुदगी ……. इल्यास की माँ जब यह क़िस्सा सुना रही थी तो उनका दिल भर आया था। वह सर झुका कर खामोश हो गयी। इल्यास ने उनकी तरफ देखा। वह बड़ी दिलचस्पी से वाक़ेयात सुन रहे थे। जो वह बयां कर रही थी। वह चाहते थे के जल्द अज़ जल्द वह बयां करे के फिर क्या हुआ राबिया आयी या नहीं उसे क्या हुआ। जब उनकी माँ को चुप बैठे देर हो…
लाबत चीन। ……. इल्यास की माँ ने कहा “बेटा वह औरत कुछ ऐसा हुस्न और ऐसी शान रखती थी के जो उससे एक बार बात कर लेता था उसका ग्रोवेदा बन जाता था। उसकी आवाज़ निहायत दिलकश और निहायत प्यारा था। शायद उसी वजह से वह मुबल्लिग़ बना कर भेजी गयी थी। वह राबिया को बहुत पसंद करती थी। राबिया भी उससे …
गौतम बुध। .. इल्यास की अम्मी ने कहना शुरू किया। “उस औरत ने बयान किया के गौतम बुध ने हिन्दुओ की तमाम किताबे गौर से पढ़ी। ख़ुसूसन दर्शन शास्त्र लेकिन उन किताबो के पढ़ने से उनकी तसल्ली नहीं हुई। वह बचपन ही से हर बात को सोचने और समझने की कोशिश करते थे। जों जों उनकी उम्र और उम्र के साथ साथ इल्म पढता किया उनके गौर व फ़िक्र करने की सलाहियत भी बढ़ती गयी। जब वह जवान हुए और उन्होंने देखा के बाज़ इंसान खुश हाल है बाज़ मालदार है। बाज़ हुक्मरान है। यह लोग खूब ऐश व…
अजीब अक़ाइद जब इल्यास नमाज़ पढ़ कर आये तो उनकी माँ भी नमाज़ से फ़ारिग़ हो चुकी थी वह उनके पास आकर बैठ गए। उन्होंने कहा :”अम्मी जान तुम कहती हो के वो औरत बुध को भगवान् समझती थी। अम्मी :बेटा ! उसने मुझे बताया था के खुद भगवान् बुध के कालिब में आये थे दरअसल वह भगवान् की क़ायल नहीं थी। उसकी बातो से पता चला था के खुद बुध ही ने भगवान् के बारे में कोई साफ़ राये ज़ाहिर नहीं की। मालूम ऐसा होता है के वह खुदा के हसती ही के क़ायल नहीं थे। इसी लिए वह…
