Author: umeemasumaiyyafuzail

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मुल्क हिन्द    अम्मी ने कहना शुरू किया “बेटा अगले रोज़ राफे एक औरत को लेकर अपने साथ लाये बड़ी खूबसूरत थी. उसकी चाँद सी पेशानी पर बिंदी लगी हुई थी। साड़ी बांधे थी। कानो में बुँदे थे। जिसमे क़ीमती मोती लटक रहे थे। पैरो में चप्पल थी। उसकी सूरत से बड़ी शान ज़ाहिर थी। उसका लिबास देख कर मुझे बड़ी हैरत हुई क्यू के उससे पहले मैंने कभी ऐसा लिबास नहीं देखा था। वह फ़ारसी ज़बान बोल लेती थी। राफे ने कहा :यह है वो औरत जिसका मैंने ज़िक्र किया था। मैंने उस औरत को ताज़ीम की…

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गम के बादल। …….                मेरी माँ मुझे ऐसी दास्ताँ सुनाती जा रही थी जो मई बिलकुल भूल चूका था। लेकिन अब उनकी याद दिलाने से इस तरह कुछ कुछ याद  आरहा था जिस तरह भूला हुआ ख्वाब याद आने लगता  है। मुझे याद आगया था के एक गोरी चिट्टी लड़की जिसके रुखसार ताज़ा गुलाब की  पत्तियों की तरह सुर्ख सफ़ेद थे जिसका चेहरा गोल और आंखे बड़ी बड़ी थी। जिसकी सूरत निहायत ही पाकीज़ा और दिलफरेब थी। मेरे साथ खेला करती थी। उसकी प्यारी सूरत अब तक मेरे दिल पर नक़्श थी। मई…

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 मंगनी। ……. इल्यास खुश होते हुए अपने घर पहुंचे। उनकी अम्मी ने उनको देखा। उनका चेहरा भी ख़ुशी से खिल उठा। उन्होंने कहा :बीटा हस्ते हुए आरहे हो। अल्लाह तुम्हे हस्ता हुए रखे क्या अमीर ने तुम्हारी दरख्वास्त   मंज़ूर कर ली ? इल्यास :जी हां मगर बहुत कुछ कहने सुनने के बाद। अम्मी :मई जानती थी तुम अभी नो उम्र हो इसीलिए उन्हें तुम्हे इजाज़त देने में ताम्मुल हुआ होगा। इल्यास : जी हां। अम्मी : लेकिन तुमने यह नहीं कहा के अमीरुल मोमेनीन हज़रत उस्मान गनी रज़ि अल्लाह ने तुम्हे थोड़ी उम्र में अमीर कैसे मुक़र्रर कर…

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काबुल पर लश्कर कशी   हमारा नॉवेल उस ज़माने से शुरू होता है जबकि सय्य्दना हज़रात उस्मान गनी रज़ी  अल्लाह सरीर आरए खिलाफत थे। दुनियाए इस्लाम में अमन व सुकून था। मुमालिक मिस्र व शाम,इराक ,ईरान उन सब पर परचम लहराने लगा था। उन मुल्को से कुफ्र व आल्हाद की घोर घटाए दूर हो गयी थी। और नेज़ इस्लाम जिया पॉश हो गया था। उस ज़माने में इराक के गौरनेर अब्दुल्ला बिन आमिर थे। निहायत नेक और बड़े खुद्दार थे। बहादुर और नज़ीर  भी थे.। उनके तहत में ईरान भी था।ईरान की सरहद अफगानिस्तान से मिलती थी। चुके इस्लामी फतूहात…

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