Author: umeemasumaiyyafuzail

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 मर्ज़बान की  अदावत,,,,,,,,                                               जासूसों का काफला जो  सौदागरों के भेस  में काबुल रवाना हुआ था। चार आदमीओ पर मुश्तमिल था। उनके नाम यह है  :सालेही ,अब्बास ,मसूद और इल्यास। इनमे सलेही  मेरा काफला थे। इस क़ाफ़ले में  सबसे कमसिन इल्यास थे। चुके पहाड़ी इलाक़े में  सफर करने का ख्याल था इसलिए  ऊँट साथ ले गए थे घोड़ो पर ही सामान तेजारत बार  किया गया और घोड़ो पर ही यह लोग सवार हुए।  इन लोगो ने अपना मख़सूस अरबी…

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 गुमशुदगी …….                                                               इल्यास  की माँ जब यह क़िस्सा सुना रही थी तो उनका दिल भर आया था। वह सर झुका कर खामोश हो गयी। इल्यास ने उनकी तरफ देखा। वह बड़ी दिलचस्पी से वाक़ेयात सुन रहे थे। जो वह बयां कर रही थी। वह चाहते थे के जल्द  अज़ जल्द वह बयां करे के फिर क्या हुआ राबिया आयी या नहीं  उसे क्या हुआ।  जब उनकी माँ को चुप बैठे देर हो…

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 लाबत चीन। …….                                                                                इल्यास  की माँ ने कहा “बेटा  वह औरत कुछ ऐसा हुस्न  और ऐसी शान रखती थी के जो उससे एक बार बात कर लेता था उसका  ग्रोवेदा बन जाता था। उसकी आवाज़ निहायत दिलकश और निहायत  प्यारा था। शायद उसी वजह से  वह मुबल्लिग़ बना कर भेजी गयी थी। वह राबिया को बहुत पसंद करती थी। राबिया भी उससे …

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 गौतम बुध। .. इल्यास की अम्मी ने कहना शुरू किया। “उस औरत ने बयान किया के गौतम बुध ने हिन्दुओ की तमाम किताबे गौर से पढ़ी। ख़ुसूसन दर्शन शास्त्र लेकिन उन किताबो के पढ़ने से उनकी तसल्ली नहीं हुई। वह बचपन ही से हर बात को सोचने और समझने की कोशिश करते थे। जों जों उनकी उम्र और उम्र के साथ साथ इल्म पढता किया उनके गौर व फ़िक्र करने की सलाहियत भी बढ़ती गयी। जब वह जवान हुए और उन्होंने देखा के बाज़ इंसान खुश हाल है बाज़ मालदार है। बाज़ हुक्मरान है। यह लोग खूब ऐश व…

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अजीब अक़ाइद जब इल्यास नमाज़ पढ़ कर आये तो उनकी माँ भी नमाज़ से फ़ारिग़ हो चुकी थी वह उनके पास आकर बैठ गए। उन्होंने कहा :”अम्मी जान तुम कहती हो के वो औरत बुध को भगवान् समझती थी। अम्मी :बेटा ! उसने मुझे बताया था के खुद भगवान् बुध के कालिब में आये थे दरअसल वह भगवान् की क़ायल नहीं थी। उसकी बातो से पता चला था के खुद बुध ही ने भगवान् के बारे में कोई साफ़ राये ज़ाहिर नहीं की। मालूम ऐसा होता है के वह खुदा के हसती ही के क़ायल नहीं थे। इसी लिए वह…

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अजीब मज़हब। इल्यास बड़े गौर से उन हालात को सुन रहे थे। उन्होंने कहा :अम्मी जान उससे मालूम हुआ हिन्द पुर फ़िज़ा मुल्क है। ” अम्मी :उस औरत ने जब उस मुल्क के हालात बयान किये तो मुझे भी उसके देखने का बड़ा इश्तियाक़ पैदा हो गया था। लेकिन उस मुल्क में एक बड़ी कमी है। और उस कमी की वजह से मेरा सारा शौक़ ठंडा पड़ गया।  इल्यास :वह क्या कमी है अम्मी जान ? अम्मी :बावजूद वहा तरह तरह के फल है। क़िस्म क़िस्म के मेवे है। बड़े लज़ीज़ और खुश ज़ायक़ा मगर खुजूरे नहीं है।  इल्यास…

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मुल्क हिन्द    अम्मी ने कहना शुरू किया “बेटा अगले रोज़ राफे एक औरत को लेकर अपने साथ लाये बड़ी खूबसूरत थी. उसकी चाँद सी पेशानी पर बिंदी लगी हुई थी। साड़ी बांधे थी। कानो में बुँदे थे। जिसमे क़ीमती मोती लटक रहे थे। पैरो में चप्पल थी। उसकी सूरत से बड़ी शान ज़ाहिर थी। उसका लिबास देख कर मुझे बड़ी हैरत हुई क्यू के उससे पहले मैंने कभी ऐसा लिबास नहीं देखा था। वह फ़ारसी ज़बान बोल लेती थी। राफे ने कहा :यह है वो औरत जिसका मैंने ज़िक्र किया था। मैंने उस औरत को ताज़ीम की…

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गम के बादल। …….                मेरी माँ मुझे ऐसी दास्ताँ सुनाती जा रही थी जो मई बिलकुल भूल चूका था। लेकिन अब उनकी याद दिलाने से इस तरह कुछ कुछ याद  आरहा था जिस तरह भूला हुआ ख्वाब याद आने लगता  है। मुझे याद आगया था के एक गोरी चिट्टी लड़की जिसके रुखसार ताज़ा गुलाब की  पत्तियों की तरह सुर्ख सफ़ेद थे जिसका चेहरा गोल और आंखे बड़ी बड़ी थी। जिसकी सूरत निहायत ही पाकीज़ा और दिलफरेब थी। मेरे साथ खेला करती थी। उसकी प्यारी सूरत अब तक मेरे दिल पर नक़्श थी। मई…

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 मंगनी। ……. इल्यास खुश होते हुए अपने घर पहुंचे। उनकी अम्मी ने उनको देखा। उनका चेहरा भी ख़ुशी से खिल उठा। उन्होंने कहा :बीटा हस्ते हुए आरहे हो। अल्लाह तुम्हे हस्ता हुए रखे क्या अमीर ने तुम्हारी दरख्वास्त   मंज़ूर कर ली ? इल्यास :जी हां मगर बहुत कुछ कहने सुनने के बाद। अम्मी :मई जानती थी तुम अभी नो उम्र हो इसीलिए उन्हें तुम्हे इजाज़त देने में ताम्मुल हुआ होगा। इल्यास : जी हां। अम्मी : लेकिन तुमने यह नहीं कहा के अमीरुल मोमेनीन हज़रत उस्मान गनी रज़ि अल्लाह ने तुम्हे थोड़ी उम्र में अमीर कैसे मुक़र्रर कर…

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