बदहवासी……. काबुल का क़िला से बाहर जो गार था। इस पर मेला लगता था। यह मेला इस ज़माने से…
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जाबुल पर क़ब्ज़ा …… …
मुलाक़ात। ….. …
बसत पर ग़लबा …. …
राफे की रवानगी….. …
बाक़िया हैरतनाक हाल ….. असर की नमाज़ के बाद इल्यास और राफे दोनों फिर एक जगह जमा हुए अम्मी…
राफे की दास्तान …. इल्यास ज़ुहर की नमाज़ पढ़ कर कैंप में वापस आये। उनकी अम्मी और…
बोद्ध ज़ोर का हश्र …. जब मुसलमानो का दादर पर क़ब्ज़ा पूरी तरह से हो गया तो सुबह सादिक़…
दादर की फतह….. हम्माद राफे जैसे वह पेशवा समझ रहे थे और इल्यास के कहने से…
इंकेशाफ राज़ ( राज़ का ज़ाहिर होना ) मुस्लमान असर के टाइम लौट कर अपने कैंप पर पहुंच गए।…
