ईमान की पुख़्तगी…….. दूसरे रोज़ हुक्मरां और अब्दुल्लाह के साथ पचास सवारों के रवाना हुए अब्दुल्लाह ने एक क़ासिद अपनी और हुक्मरां की आमद की खबर करने के लिए आगे रवाना कर दिया। क़ासिद को समझा दिया कि वह यह भी खबर देदे की हुक्मरां मुस्लमान हो गए है। क़ासिद ने अब्दुर्रहमान की खिदमत में पहुंच कर तमाम हालात बयान कर दिए। अब्दुर्रहमान को बड़ी ख़ुशी हुई। उन्होंने से सलेही से सुन लिया कि इलियास की गुफ्तुगू से मुतास्सिर होकर अब्दुल्लाह मुस्लमान हुए है। उन्होंने सलेही और इलियास के हमराह पांच सौ मुस्लमान…
Author: umeemasumaiyyafuzail
वादी अरजनज आगोश इस्लाम में….. शहर अरजनज के फतह होने का कश तक इलाक़ा पर असर पड़ा। वहा के आतिश परस्त भी घबरा गए। कुछ तो उनमे से भाग निकले। कुछ अपनी अपनी बस्तियों में आबाद रहे उन्होंने तय कर लिया की जब मुसलमान उनके पास आवेंगे तो उनकी इतायत करंगे। चुनांचा जब मुस्लमान कश के इलाक़ा में दाखिल हुए तो वहा के बस्ती वालो ने उनकी एतायत कर ली और उनसे तिजारत शुरू कर दी। मुस्लमान हर चीज़ की अच्छी क़ीमत देते थे।…
मसालेहत ………. मुसलमानो ने वापस आते हुए सबसे पहले शहीदों को एक जगह जमा किया। जनाज़ा की नमाज़ पढ़ी और गढ़े खोद कर दफन कर दिया। उसके बाद वह तमाम मैदान में फैल गए और कुछ आदमी मक़तूलाइन के घोड़ो को पकड़ने और मरने वालो के हथियार जमा करने लगे। जो काफिर चांदी का कोई ज़ेवर पहने हुए थे वह भी उतर लिए शुमार करने पर मालूम हुआ की सवा दो सौ मुस्लमान शहीद हुए और साढ़े सात हज़ार काफिर मारे गए .उनके ज़ख़्मियो की तादाद तो मालूम न हो सकी अलबत्ता मुस्लमान दो सौ के क़रीब ज़ख़्मी हुए …
शिकस्त …. अभी तक मर्जबान भी एक हज़ार सवारों को अपने जुलु में लिए क़ल्ब में खड़ा लड़ाई का तमाशा देख रहा था। वह भी बहादुर और जंगजू था। मुसलमानो की हमलो की शान देख देख कर उसे भी गुस्सा और जोश आरहा था। लेकिन वह अभी तक अपनी जगह जमा खड़ा था और बड़े गौर से मैदान जंग की तरफ देख रहा था। अचानक उसने रकाबो पर खड़े होकर जंग की दूसरी…
खून रेज़ जंग …… रात खैरियत से गुज़र गयी। जब सपिदा सेहर नमूदार हुआ तो इस्लामी लश्कर में सुबह की अज़ान हुई.अज़ान की आवाज़ सुनते ही मुजाहिदीन जल्दी जल्दी उठ कर कैंप से बाहर ज़रुरियात से फरागत करने के लिए चले गए। वहा से वापस आकर उन्होंने वज़ू किये नमाज़ पढ़ी अब्दुर रहमान ने नमाज़ पढाई। …
सुलह से इंकार …… इस्लामी लश्कर कोच व क़याम करता ईरान को तय करके सीतान की तरफ बढ़ा। अगरचे सिर्फ आठ हज़ार मुस्लमान थे और एक ऐसे मुल्क की तरफ बढ़ रहे थे जो ऐसे बर्रे आज़म से मिला हुआ था जिसकी आबादी करोड़ो की तादाद में थी। पहले तो खुद काबुल ही बे शुमार फौजे उनके मुक़ाबला में ला सकता था। फिर हिंदुस्तान और उसके राजा महाराजा तो टिड्डी विल लश्कर भेज सकते थे। लेकिन मुस्लमान डरा नहीं करता और फिर मुजाहिद उसके पेश नज़्ज़ार तो सिर्फ जिहाद रहता…
लश्कर इस्लाम का कोच अब्दुल्ला बिन आमिर ने सलेही को अमीर उल मूमिनीन की खिदमत में रवाना किया। इलियास और उनकी अम्मी दोनों दुआएं मांगते थे की खलीफा मुस्लिमीन लश्कर कशी की इजाज़त दे दे। सबसे ज़्यदा बेचैनी के साथ वही दोनों उनकी वापसी का इंतज़ार कर रहे थे। आखिर सलेही वापस आगये। अमीर उल मूमिनीन हज़रत उस्मान गनी खलीफा सोएम ने अब्दुल्लाह बिन आमिर को लिखा : “तुम काबुल से नज़दीक हो और मै दूर हु। तुमने जासूसों के ज़रिये के हालात मालूम कराये है। तुम मुझसे ज़्यदा सूरत हासिल से…
राज़ की कुंजी ,,,,,,,,, जासूसों का यह काफला तेज़ क़दमी से वापस लौटा। उन्होंने कश और ज़रनज का दरमियानी इलाक़ा बहुत जल्द तय कर लिया। सलेही तो चाहते थे की इत्मीनान और आराम से सफर करे लेकिन इल्यास की ख्वाहिश थी की या तो ज़मीन की तनाबे खींच जाये या उनके घोड़े के पर लग जाये और वह जल्द से जल्द बसरा पहुंच जाये। इस जल्दी की यह वजह थी की अब्दुल्लाह ने उन्हें बता दिया था सुगमित्रा की शादी अनक़रीब होने वाली है वह चाहते थे की अगर सुगमित्रा हक़ीक़त में राबिआ…
काबुल का राजा……. दूसरे रोज़ सुबह की नमाज़ के बाद अब्दुल्लाह आये उन्होंने बैठते ही दरयाफ्त किया। “दादर के धार में गए थे ?” इल्यास ने जवाब दिया “मैं गया था ” उसके बाद उन्होंने तमाम हालात उनसे ब्यान किये। उन्होंने कहा। “तुमने सुगमित्रा को क़रीब से देखा है ?” इल्यास :इतने क़रीब से देखा है जैसे मैं और तुम बैठे है। अब्दुल्लाह :बड़े खुश नसीब हो। मैं ऐसे कई राजकुमारों को जानता हु जो उसके…
इल्यास की हैरत…….. जब सुबह हुई तो यह काफला दादर से दूर निकल गया था। लेकिन अब भी उन्हें तआक़ुब का अंदेशा था। कमला इस नवाह के रास्तो से बखूबी वाक़िफ़ थी। उसने राह छोड़ी और उन्हें लेकर एक गैर मारूफ रास्ता पर रवाना हुई। चुकी उन्होंने सीधा रास्ता छोड़ दिया इसलिए कई दिन में उस…
