बोद्ध ज़ोर का हश्र …. जब मुसलमानो का दादर पर क़ब्ज़ा पूरी तरह से हो गया तो सुबह सादिक़ हुई। कई मुसलमानो ने मिल कर अज़ान दी। यह पाहि सदाए तौहीद थी जो दादर के क़िला में बुलंद हुई मुसलमानो ने वज़ू किये और खुले मैदान में नमाज़ की तैयारी करने लगे। उन्हें यह खौफ भी न हुआ की वह काफिरो के क़िला में है। चंद ही घंटे हुए की उन्होंने क़िला फतह कर लिया। कही कुफ्फार नमाज़ की हालत में उन पर हमला न कर दे। उन्होंने जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ी। काफिरो को अपने घरो…
Author: umeemasumaiyyafuzail
दादर की फतह….. हम्माद राफे जैसे वह पेशवा समझ रहे थे और इल्यास के कहने से चले। उन्होंने अपने दस्ता को बुलाया और उन्हें यह समझा कर की दुश्मन शब् खून मारने वाला है मुसलमानो को होशियार कर दो। उन्हें तमाम सिम्तो पर भेज दिया। और खुद लीडर के खेमा की तरफ चले। उन मुहाफ़िज़ दस्तो ने सेंट्रो में जाते ही नींद से बेदार हो कर जिहाद के लिए आओ के नारे लगाए और जब उन्होंने देखा की मुस्लमान कलबलाने लगे है तो होशियार के नारे इतनी ऊँची आवाज़ से लगाए जो कैंप से बाहर न…
इंकेशाफ राज़ ( राज़ का ज़ाहिर होना ) मुस्लमान असर के टाइम लौट कर अपने कैंप पर पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने असर की नमाज़ पढ़ी और कुछ देर आराम किया। मगरिब की अज़ान होने पर जमात के साथ नमाज़ पढ़ी और अलाव जला कर खाने का इंतेज़ाम करने लगे। इस इस्लामी लश्कर के साथ कुछ गुलाम भी थे। वह लकड़िया काट लाये जो रात भर जलाई जाते। शुरू रात से जो अलाव रोशन होते तो सुबह तक रोशन रहते। खाना खा कर मुसलमानो ने ईशा की नमाज़ पढ़ी और सो रहे।…
पुरजोश हमला …… जब वह दरबार से निकल कर थोड़ी दूर चले उन्होंने पेशवा की सवारी आती देखी। उस पेशवा की जिसने इल्यास को क़ैद कर दिया था। उसकी सवारी के आगे सवारों का एक दस्ता था। दस्ता के पीछे धार के पुजारी थे। उनके पीछे पेशवा था। पेशवा के पीछे सवार थे। हम्माद इल्यास और उनके साथी सड़क के किनारे पर खड़े हो गए जब सवारी उनके सामने आयी तो पेशवा ने इल्यास को गौर से देखा उसने सवारी रुकवाई और इल्यास को आगे आने का इशारा किया। वह उसके पास जाकर खड़े हुए। पेशवा ने…
सुलह का पैग़ाम ….. दादर वालो को यह मालूम हो गया था की इस मुल्क पर मुसलमानो ने लश्कर कशी कर दी है। और अर्जनज तक का इलाक़ा फतह कर लिया है। उन्होंने यह भी सुन लिया की अर्जनज (जगह का नाम ) का हुक्मरान महारानी और राजकुमारी के साथ मुस्लमान हो गया है। उन्हें उसके मुस्लमान होने का बड़ा ताज्जुब हुआ था उस नवाह में यह मशहूर था की अर्जनज का हुक्मरान अपने मज़हब में बड़ा पक्का और बहुत मज़बूत है। साथ ही उन्होंने यह भी सुना की इस्लामी लश्कर बढ़ा चला आ रहा…
बिमला आगोश इस्लाम में …… यह दोनों ईशा के टाइम लश्कर में पहुंचे उस वक़्त अज़ान हो रही थी बिमला ने कहा ” कहा चले गए थे बेटा ” इल्यास : मैं अपनी बहन के पास गया था। बिमला : अच्छा ,बहन को साथ ही लाये हो। देखु तो। उसने बढ़ कर कमला को देखा। शायद उसे पहचान लिया ” अच्छा बी कमला है। तुमने तो मुझे न पहचाना होगा। कमला : मैंने देखा ज़रूर है। बिमला : मैं तुम्हे अच्छी तरह जानती हु। तुम्हारे पिता तो अच्छी तरह है। कमला : अच्छी तरह है। इसी…
ग़मज़दा नाज़नीन। इल्यास की माँ को जब यह मालूम हुआ की अरब औरते वही रहेंगी तो उन्हें बड़ी फ़िक्र हुई। वह काबुल तक जाना चाहती थी। बिमला उनकी हम ख्याल थी। दोनों ने इल्यास से कहा “अगर हम दोनों यही रहे तो बड़ी तकलीफ होगी। तुम लीडर से कहा कर हमें साथ ले चलने की इजाज़त लेलो। इल्यास ने कहा “यह बहुत मुश्किल है। वह मुझे यहाँ रखना चाहते थे। कहने सुनने से मुझे साथ चलने की इजाज़त दी है। बिमला : तुम कहो तो। शायद इजाज़त देदे। और अगर तुम न कह सको तो मुझे…
बाक़िया दास्तान इलियास वहा से सीधे अपनी माँ के पास पहुंचे उन्होंने उनसे वह तमाम हालात बयान कर दिए जो औरत से सुने थे। उनकी माँ ने कहा “वह कम्बख्त भी मुसीबतें ही झेलती रही है। मैंने उसके लिए बद्दुआ नहीं की खुदा ने खुद उसे सजा दी है। लेकिन खैर यह तो मालूम हो गया की मेरी राबिआ सुगमित्रा बानी हुई है। आराम व राहत से है। शहज़ादी है। मगर यह अफ़सोस है की वह काफिर है। ” इलियास : उसका अफ़सोस मुझे भी है। लेकिन वह ऐसे काफिर बनाई गयी जब उसे कुछ पता नहीं था।…
आप बीती दूसरे रोज़ अब्दुल्लाह ने इल्यास के पास आकर कहा “चलिए वह औरत आपका इंतज़ार कर रही है ” इल्यास उनके साथ चले। वह एक बाग़ में झोपड़ी के अंदर रहती थी उनकी आहट पा कर बाहर निकल आयी। इल्यास ने उसे देखा। पहले जैसे वह जवान न रही। मगर हुस्न रफ्ता के दिलकश आसार अब भी चेहरा से ज़ाहिर थे। उसकी सेहत अच्छी थी। अच्छी सेहत ने चेहरे की दिलकशी को और बढ़ा दिया था। आँखों में अब भी तेज़ चमक थी। उसने इल्यास को देखा बगैर इरादा के इल्यास ने सलाम किया। उसने उन्हें दुआ दी…
दीन अल्लाह में दाखिला … … जिस अरसे में लश्कर कोच के लिए तैयार हुआ। उस अरसा में अब्दुर्रहमान ने अब्दुलरब और उनके साथियो की इस्तेकबाल की। उनके सामने खुजुरे पेश की। और सत्तू घोल कर रखा। अब्दुलरब उनका सदा खाना देख कर भी ताज्जुब हुआ। उन्होंने कहा ‘तुम्हारी ग़ज़ा यही है। ” अब्दुर्रहमान : ऐसे तो हम खाने को सब कुछ खाते है परिंदो का गोश्त ,ऊँट का गोश्त ,बकरो का गोश्त ,रोटी लेकिन हमें रग़बत खुजूरो से है। सत्तू भी बड़े शौक़ से खाते है। इन्हे ही मुसलमानो के सामने पेश करते है। अब्दुलरब ने खुजूरो और सत्तू…
