“سر، آپ نے دیکھا، اس بیوقوف کو تو کلاس میں بیٹھنا بھی نہیں آتا۔ مجھے سمجھ نہیں آرہی کہ وہ اس یونیورسٹی میں کیا کر رہی ہے۔” اذلان کا غصہ بڑھتا جا رہا تھا۔ “معاف کیجئے گا، یہ غلطی سے ہوا ہے۔” حرم آنکھوں میں آنسو لیے بولا۔ “بہت ہو گئی اذلان، حریم نے معافی مانگ لی ہے، اب بیٹھو، مزید وقت مت ضائع کرو۔” اذلان بولنے کے لیے لب کھولنے ہی والا تھا کہ پروفیسر بولا۔ اذلان نے ہونٹ بھینچے اور واپس اپنی سیٹ پر آ گیا۔ حرم نے اپنی توہین محسوس کی اور خود کو اندر بند…
Author: umeemasumaiyyafuzail
tawaif part 5 مہرما کا بازو پکڑ کر شاہ کمرے سے باہر نکل گیا۔ “مجھے جنگلی چھوڑ دو۔” مہر ماہ احتجاج سے بولی۔ شاہ اسے کھینچ رہا تھا۔ باقی کسبی بھی کمرے سے باہر چلی گئیں۔ مہر چاند پر بھاگ رہی تھی لیکن اس کا کوئی اثر نہیں ہو رہا تھا۔ “زلیخا بیگم آپ پچھتائیں گی، آپ نہیں جائیں گی۔” مہر میری گردن پر کھیل رہی تھی۔ زلیخا بیگم تشویش سے اسے دیکھنے لگیں۔ “مجھے اکیلا چھوڑ دو۔ تمہیں کون لگتا ہے؟” مہر سمندر سے باہر پھینکی ہوئی بھوکی مچھلی کی طرح لگ رہی تھی۔ شاہ کمرے سے باہر…
“یہاں امیروں کے لیے پارٹیاں ہوتی ہیں، جن میں بے شرم لڑکیاں آتی ہیں۔ شرم کے یہ داغ یہاں اتنی تیزی سے نہیں بڑھتے۔” آپ کو اندازہ ہو جائے گا کہ یہ آپ کے لیے بہتر ہے۔” مہر کڑوی تھی۔ “اوہ… کیا تم بدتمیز ہو؟” اس نے ہچکچاتے ہوئے اس نازک حسن کی لعنت کو دیکھتے ہوئے کہا۔ “ہاں، میں بدتمیز ہوں۔” مہر کا چہرہ سنجیدہ ہوگیا۔ وہ روتی ہوئی مہر کو دیکھنے لگی۔ مہر نے اور کچھ نہیں کہا اور باہر نکل آئی۔ وہ فرش پر پاؤں رکھے کمرے کی طرف چلنے لگی۔ پازیب کی گھنٹی خاموشی…
“ہاں بابا سان۔” شاہ فون کان سے لگا کر باہر نکلا۔ “تم کہاں ہو؟” وہ نرمی سے بولا۔ “خیریت۔” شاہ صاحب نے بتانا ضروری نہیں سمجھا۔ “شاویز کے بارے میں معلوم کرو۔ ہم نے سنا ہے کہ آج برہان کے ساتھ ایسا ہو رہا ہے۔” وہ ناگواری سے بولا۔ ’’اس کا مطلب…
لاک یہ میرا سرور ہے۔ اثر آپ کا ہے۔ آپ کی آنکھیں مجرم ہیں پیارے پیارے یہ اب تک کیوں ہے؟ یہ محبت کی فطرت ہے شرابی دل تمہارا چور ہے۔ پیارے پیارے تو کوئی ہوش نہیں ہے اس کا اثر کیا ہے؟ کوئی شعور نہیں ہے اس کا اثر کیا ہے؟ دلبر تم سے ملنے کے بعد جب شاہ پرندوں کے نظارے سے اندر آیا تو لڑکیاں دھن پر ناچ رہی تھیں۔ مدھم روشنیوں میں خوبصورتیاں ناچ رہی تھیں، چاروں طرف اندھیرا تھا اور ان پر روشنیاں جل رہی تھیں۔ کیسا خوابیدہ ماحول بنا ہوا تھا۔ وہ آکر…
तकमील आरज़ू …….. जिस वक़्त इल्यास ने झंडा लहराया ठीक उसी वक़्त कई ख़ुशी मुसलमानो ने मिल कर सुबह की अज़ान दी। एक तो सुबह का वक़्त था दूसरा तूफान के बाद का सा सुकून छाया हुआ था अज़ान की दिलकश आवाज़ तमाम क़िला में गूँज उठी अज़ान सुनते ही मुस्लमान जहा कही भी थे खामोश खड़े हो गए। अज़ान खत्म होते ही हर मुस्लमान ने दुआ पढ़ी और अमीर के झंडा की तरफ चला। थोड़े ही देर में तमाम मुस्लमान वहा आकर जमा हो गए जोकि क़िला के अंदर वाले तमाम मैदान में लाशे पड़ी…
काबुल की फतह …. मौसम सरमा आहिस्ता आहिस्ता ख़त्म होने लगा। सर्दी भी बूढी हो गयी। नरम गर्म दिन होने लगे मुस्लमान सर्दी गुज़रने का ही इंतज़ार कर रहे थे अब उन्होंने हमला की तैयारी शुरू की ३५ हिजरी शुरू हो गया था। मुहासरा को एक अरसा गुज़र गया था इसलिए क़िला वाले भी तंग आगये थे वह चाहते थे की क़िस्मत का फैसला जल्द से जल्द हो जाये राजा भी तंग हो गया था। उसे यह ख्याल नहीं था की मुस्लमान काबुल के सख्त सर्दी बर्दाश्त करते हुए मुहासरा किये पड़े रहेंगे वह समझ रहा था की जब सख्त…
शरारत……. इस दूसरे लोगो से भी काबुल वालो ही को हार हुई। उनके सिपाहियों की भारी तादाद मैदान जंग में खेत रही हज़ारो ज़ख़्मी हो गए हज़ारो मुसलमानो का दबाओ पड़ने से इधर उधर भाग गए और राजा के कैंप में जिस क़द्र सामान और दौलत थी सब मुसलमानो के हाथ लगा मुसलमानो को इस फतह से बड़ी ख़ुशी हुई। क़िला कुछ ऐसे मुक़ाम पर और ऐसा वाक़्या हुआ था की उसका मुहासरा दुश्वार था फिर भी अब्दुर्रहमान ने तीन तरफ से उसका मुहासरा कर लिया उस ज़माना में यह क़िला लंगड़ा क़िला कहलाता था काबुल वाले महसूर…
दूसरा हमला …… कई रोज़ में जाकर इल्यास इस क़ाबिल हुए कि उनकी ज़िन्दगी की उम्मीद हो चली। इस अरसा में अम्मी ,फातिमा (बिमला) कमला और राबिआ ने उनकी तीमारदारी में दिन रात एक कर दिए। खास कर राबिआ सारा सारा दिन और सारी सारी रात जगती रही। सबसे ज़्यादा तीमारदारी उसने की उसने अम्मी को रात को जागने नहीं दिया सब कुछ करती रही। अबू तय्यब ने भी बड़ी कोशिश और जा निशानी से इलाज किया। लीडर अबुर्रहमान भी क़रीब क़रीब रोज़ ही अयादत के लिए आते रहे। इल्यास तो सब ही के मश्कूर थे लेकिन राबिआ के खास…
सेहर हुस्न …… इल्यास के काफी गहरा ज़ख्म आया था। लेकिन वह बेहोश नहीं हुए थे अलबत्ता तकलीफ इतनी थी कि वह बेचैन थे उनके ज़ख़्मी शाने से खून का फवारा उबल रहा था। एक मुजाहिद ने खून बंद करने के लिए ज़ख्म मिला कर अमामा की पट्टी ज़ोर से कस दी इस तदबीर से खून निकलना बिलकुल बंद तो नहीं हुआ लेकिन बड़ी हद तक कमी हो गयी। इल्यास को सख्त तकलीफ थी लेकिन उन्होंने फिर भी अपनी क़रीब वालो से दुश्मनो का पीछा करने को बोला। उनसे लोगो ने कह दिया अमीर ने पीछा करने को मना…
