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Home»Hindi Novel»Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel)

fatah kabul ( islami tarikhi novel) part 13

fatah kabul part 13
umeemasumaiyyafuzailBy umeemasumaiyyafuzailJanuary 14, 2022Updated:July 5, 2026 Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel) No Comments7 Mins Read
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तब्लीग इस्लाम,,,,,,,

 
इन  लोगो ने रात निहायत आराम से बसर की। सुबह को नमाज़ पढ़ कर तिलावत करने लगे। इल्यास निहायत खुश थे। एक तो क़ुरान की निहायत ही शीरें ज़बान है। दूसरे  इल्यास का लहजा बड़ा ही प्यारा था। सुनने वालो को वजद आजाता था। जिस वक़्त वह  कर रहे थे  वही हिंदी जो ज़रनज का सिपह सालार था आगया। उनके क़रीब बैठ कर सुनने लगा। जब उन्होंने तिलवात ख़त्म की तो ” कैसा  है यह क्या है?
  • इल्यास : यह वह मुक़द्दस किताब है जो परवरदिगार आलम ने अपने मुहतरम रसूल खुदा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल अल्लाह अलैहि वसल्लम के  ज़रिये  नाज़िल फ़रमाया है। 
  • हिंदी : काश मै अरबी  वाक़िफ़ होता और उसे पढ़ कर समझता। 
  • इल्यास : यह  कुछ मुश्किल नहीं है। बहुत जल्द तुम इस ज़बान को हासिल कर सकते हो। 
  • इल्यास : मैं चंद बाते दरयाफ्त करना चाहता हु। 
  • इल्यास : शौक़ से दरयाफ्त कीजिए। 
  • हिंदी : ईश्वर भगवान् या खुदा के मुताल्लिक़  क्या ख्याल है ?
  • इल्यास :हमारा एतेक़ाद है  के अल्लाह ही ने सब कुछ पैदा किया है। वही जिलाता और माररता है। जैसा के खुद अल्लाह फरमाता है “तमाम तारीफे अल्लाह के लिए है जिसने आसमानो और ज़मीनो को पैदा किया। है और उजाले को पैदा किया है। 
  •               एक मुक़ाम पर अल्लाह फरमाता है “सिवाए उसके कोई माबूद नहीं।  उसने हर चीज़ पैदा की है की है। उसी की इबादत करो। 
  • हिंदी : हमारा  अक़ीदा शायद तुम्हे मालूम नहीं। 
  • इल्यास : मालूम है। तुम खुदा को कुल चीज़ो का ख़ालिक़ यानि पैदा करने वाला नहीं मानते। 
  • हिंदी : यही बात है हमारा अक़ीदा है के भगवान् आत्मा रूह और पुर (मादा)हमेशा से है। 
  • इल्यास : सोचने और समझने की बात यह है के रूह और मादा को भी किसी ने ज़रूर पैदा किया है। जिसने उन्हें पैदा किया है। वही ख़ालिक़ कुल  क़ादिर मुतलक़ है उसी को खुदा कहते है। क़ुरआन शरीफ में है “और अल्लाह ही के लिए असम्मान और ज़मीन की बादशाहत है। (और उसकी भी )  दरमियान में है। वह जो कुछ चाहता है पैदा करता है। और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। 
  • हिंदी : मैं हलफ से कहता हु के खुदा को मैं भी ऐसा ही समझता था। जिसने सब चीज़ो को पैदा  और जो हर चीज़ पर  क़ादिर नहीं है। वह हो सकता। 
  • इल्यास : वही पैदा करता है वही  मारता है। परवरदिगार अपने कलाम पाक में खुद फरमाता है। “वही ज़िन्दगी बख्शता है। और उसी की तरफ लौट कर जाओगे। 
  • हिंदी : तुमने सच कहा। मेरा भी यही ख्याल है।
  • इल्यास : जो लोग गुनाह करके उससे   माफी चाहते है उन्हें माफ़ कर देता है। चुनांचा उसने क़ुरआन  शरीफ में फ़रमाया है ” वह  लोग के  गुनाह  करे  और  जानो  पर ज़ुल्म  करे अल्लाह को याद करेंगे अपने गुनाहो की  बख्शीश मागेंगे। और   कौन बख्शा है गुनाहो को मगर अल्लाह और जो कुछ  उन्होंने किया उसपर ज़िद न करे। और वह जानते हो यह लोग (यानी मांगे वालो का ) बदला बख्शीश है उनके  से बहिश्ते जिनके निचे  नहरे बहती है वह उसमे हमेशा रहेंगे।  और नेक काम करने वालो का सवाब अच्छा है। 
  • हिंदी : उससे तो अवगुन  का मसला   हल  हो जाता है।  यह अक़ीदा गलत है  के एक दफा गुनाह  करने के बाद उसकी माफ़ी नहीं होती बल्कि जून की तब्दीली  सजा मिलती है। 
  • इल्यास : जून की तब्दीली  की कोई सजा नहीं है। फ़र्ज़   करो एक शख्स उस  जून में इंसान है। उससे कोई गलती सरज़द हो गयी। कल वह बिल्ली या कुत्ते के जून में आगया जब इंसान हो कर जिसे अकल व समझ अता हुई है गलती की तो जानवर होने पर तो  और भी उससे गलतिया सरज़द होंगी और जो जो वह गलतिया गलतिया करता जायेगा। बुरे से बुरे जून में जायेगा फिर उसे मुक्ति या निजात की उम्मीद कैसे हो सकेगी। और जब ईश्वर या खुदा उसे माफ़ ही नहीं कर सकता।  इबादत करने  क्या फायदा किसी की इतआयात की सिला में उम्मीद की जाती है। अगर सिला की तवका हो तो एतायत भी की जाये। इसी तरह इबादत भी  सवाब के लिए की जाती है।  और जिस इबादत से सवाब न मिलता हो उस  फायदा। जब हर गलती  हर गुनाह की पवश जून  बदलने से ज़रूर मिलेगी ईश्वर  खुदा गलतियों   और गुनाहो  को माफ़ नहीं कर सकता। तो उसे ईश्वर की इबादत कौन और क्यू करे। 
  • अब इसके मुक़ाबले में इस्लामी तालीम लीजिये। खुदा ने साफ़ तौर पर अयलान कर दिया के जो लोग गुनाह करंगे। अपने गुनाह की बख्शीश मांगे। अल्लाह उन्हें माफ़ करके बहिश्त में दाखिल करेगा। गोया अल्लाह ने अपनी क़ुदरत का इज़हार कर दिया। साथ ही या भी फार्मा दिया के बुरे अमल यानि गुनाह न करो वार्ना उसकी सजा मिलेगी। इरशाद होता है “जो कोई बुरा अमल करे उसे उसका बदला मिलेगा। और वह सिवाए अल्लाह के कोई दोस्त और मदद करने वाला न पायेगा। यानी कोई भी उसकी मदद न कर सकेगा। एक और जगह इरशाद होता है “जो कोई अपने रब के पास गुनहगार होकर आये उसके लिए जहन्नम है वह उसमे न मरेगा न जियेगा। यानि अजीब ख्वाहिश में मुब्तिला रहेगा। मरने की ख्वाहिश करेगा न मरेगा और ज़िन्दगी मौत से बदतर होगी। जहन्नम क्या जय उसके मुताल्लिक़ भी सुन लीजिये। अल्लाह ताला इरशाद फारमाता है। “यानी और क्या जाने के दोज़ख क्या है। वह न बाक़ी रखती है न छोड़ती है। चमड़ी को झुलस देती है। 
  •             दोज़ख में आग ही आग होगी। आग का बिस्तर होगा। आग का ओढ़ना होगा। आग खाने को मिलेगी  और आग से खोलता हुआ पानी पीने को मिलेगा। आग के शोले भड़कते होंगे। खुदा जहन्नम से पनाह दे। बहुत ही बुरी जगह है। 
  •             यह भी सुन लीजिये के अल्लाह ताला बड़े से बड़े गुनाह बख्श देगा लेकिन शिर्क करने वालो को हरगिज़ न बख्शेगा। चुनाचा परवरदिगार आलम ने फ़रमाया “यानी अल्लाह नहीं बख्शता उसे जो  शरीक लाये। और सिवाए उसके जिसे चाहता है बख्श देता है। 
  • हिंदी : शिर्क क्या है ?
  • इल्यास :शिर्क की तसरीह तो बहुत कुछ है लेकिन मुख़्तसरन यह है के अल्लाह के साथ किसी को शरीक न करे। वह यकता है। उसके कोई औलाद नहीं। यू वह हर जगह और हर वक़्त मौजूद रहता है। लेकिन इंसान बन कर और किसी कालिब में कभी नहीं आया। उसे कभी किसी ने नहीं देखा। इंसानी हाथो से बनाये हुए बुटो को खुदा समझ कर कर सजदा करना। किसी इंसान को खुदा के बराबर संह कर उसकी परस्तिश करना। इंसान के अलवाह  चीज़ को सजदा करना शिर्क है। 
  •   हिंदी : नौजवान तुम्हारी बातो ने इस वक़्त मेरे दिल पर बड़ा असर किया है। तुम्हारी थोड़ी सी तो उम्र है लेकिन मज़हबी मालूमात किस क़दर बढ़ी हुई है।फिर तुम्हरी गुफ्तुगू करने का अंदाज़ किस क़दर दिलचस्प है। बहुत अरसा हुआ जब यहाँ एक मुस्लमान आया था न मालूम वह क्सिकी तलाश में था  शायद एक महीना तक यहाँ ठहरा था। मैं भी जाता था। वह भी अपने मज़हब की बाते करता रहता था। मेरे दिल पर उसकी बातो का असर हुआ हुआ था। मैंने मुस्लमान होने का इरादा कर लिया था। लेकिन अभी उस पर यह बात ज़ाहिर नहीं की थी के अचानक एक रोज़ वह दादर की तरफ रवाना हो गया। 
  •        हिंदी कहे जा रहा था और इल्यास बड़ी गौर से सुन रहा था। उनका दिल तेज़ी से धड़कने लगा था। हिंदी कह रहा था। मुझे उसके इस तरह चले जाने का बाद अफ़सोस हुआ था। वह लोगो को मुस्लमान  काया  मुस्लमान करते हो ?
  • इल्यास :क्यू नहीं। है मुस्लमान मुबल्लिग है। 
  • हिंदी : अच्छा तो मुझे मुस्लमान करलो। 
  •            इल्यास को बड़ी ख़ुशी हुई। उन्होंने उसे वज़ू कराया और कलमा और कलमा शहादत पढ़ा कर मुस्लमान  बाद उन्होंने सलेही ,अब्बास,और मसऊद को बुला कर उसके मुस्लमान होने की खुशखबरी सुनायी  बहुत ही खुश हुए। 
                        
                                                        अगला भाग (सुराग रसी ) 
                                                                Previous part < > Next Part
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fatah kabul part 13 Islami Novel
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