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Home»Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel)

fatah kabul (islami tarikhi novel) part 27

fatah kabul part 27
umeemasumaiyyafuzailBy umeemasumaiyyafuzailMarch 10, 2022Updated:January 20, 2026 Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel) No Comments9 Mins Read
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 शिकस्त …. 

                                                       



अभी तक  मर्जबान भी एक हज़ार सवारों को अपने जुलु में लिए क़ल्ब में खड़ा लड़ाई का तमाशा देख रहा था। वह भी बहादुर और जंगजू था। मुसलमानो की हमलो की शान देख देख कर उसे भी गुस्सा और जोश आरहा था। लेकिन वह अभी तक अपनी जगह जमा खड़ा था और बड़े गौर से मैदान जंग की तरफ देख रहा था।

  • अचानक उसने रकाबो पर खड़े होकर जंग की दूसरी तरफ देखा उसे अबुर्रहमान और उनका रिसाला कुछ ऐसा बिखरा हुआ खड़ा  नज़र आया की वह उनकी सही तादाद का अंदाज़ा नहीं कर सका। उसे यह ख्याल हुआ की मुसलमानो का आधा लश्कर हमला आवर हुआ है। बाक़ी लश्कर अपनी जगह जमा खड़ा है। यह मौक़ा अच्छा है। अगर हमारी फ़ौज इस वक़्त जी तोड़ कर हमला करे तो मुसलमानो को पीसपा कर सकती है।
  • अफसर : मुझे तो मुसलमानो की लड़ाई का ढंग देख कर ताज्जुब हो रहा है। कम्बख्त किस जोश व खरोश से लड़ रहे है।
  • मर्जबान : उनका जोश उसी वक़्त तक है जब तक उनपर पूरी ताक़त से हमला नहीं किया जाता। जब पुरे ज़ोर से हमला होगा तो उनका जोश ख़त्म हो जायेगा और वह बजाए बढ़ने के पीछे हटने पर मजबूर हो जायेंगे।
  • अफसर :लेकिन उन्होंने हमारी तीसरी सफ को भी तोड़ दिया है।
  • मर्जबान :हमने देख लिया है। ज़रा तुम दौड़ कर अफसरों को इत्तिला कर दो की  में आकर तेज़ी से हमला करे।
  • अफसर :बेहतर है।
  •          वह घोडा दौड़ा कर मैदान जंग में आया और उसने एके बाद  दूसरे तमाम अफसरों को मर्जबान का हुक्म सुना दिया। सब अफसरों ने सिपाहियों को जोश दिलाया। तबल जंग और भो ज़ोर ज़ोर से बजा और काफिरो के दस्ते ने निहायत जोश से बढ़ कर बड़े ज़ोर से हमला किया।
  •              काफिरो का यह हमला निहायत सख्त हुआ मुस्लमान जो सर झुकाये लड़ाई में मसरूफ थे। काफिरो का यलगार  से अपनी जगहों पर क़ायम न रह सके वह ज़ोर और ज़द पड़ने पर क़दम क़दम   पीछे हटने लगे  .
  •              अगरचे अब भी मुस्लमान बड़ी सर फरोशी से लड़ रहे थे। अब  भी उनकी तलवारे  बराबर काट रही थी। वह हमला आवरो को क़त्ल कर रहे थे  .लेकिन  धकेल उन्हें पीछे  हटने  मजबूर कर  रही थी और वह मारने काटने पर भी पीछे हटते आरहे थे।
  •              मुसलमानो को यह देख कर गुस्सा आगया। उन्होंने अल्लाह हु अकबर का नारा लगाया। उस  नारे ने  मुसलमानो  की आंखे खोल दी। उन्होंने निगाहे उठा कर देखा उन्हें मालूम हो गया की काफिरो ने उन्हें काफी पीछे धकेल दिया है। उन्हें बड़ा तैश आया। उन्होंने मिल कर फिर अल्लाह हु अकबर का नारा लगाया  और निहायत जोश से हमला किया। उनके इस हमले से काफिरो के सैलाब को रोक दिया  .
  •            मुसलमानो न्र और भी फुर्ती से तलवारे चलानी शरू कर दी काफिरो ने भी ज़ोर से हमले किये  जिनका ज़ोर  और बढ़ गया। खून रेज़ी और भी तेज़ हो गयी। तलवारे निहायत फुर्ती से उठने लगी। सर कट कट कर उछलने लगी  धड़ो पर धड़ गिरने लगी। खून के फवारे उबाल पड़े सरफरोश खून में नहा पड़े।
  •                  कुफ्फार मुसलमानो को कुचलने और पीछे हटाने की सर तोड़ कोशिश  कर रहे थे। और मुस्लमान   काफिरो को मारने और पीसपा करने के लिए पूरी ताक़त से हमले कर रहे थे। चुकी फ़रीक़ैन जोश व गज़ब  में भरे हुए थे इसलिए लड़ाई का हंगामा बहुत बढ़ गया था।
  •             कुफ्फार के लश्कर में तबल  बज ही रहा था मगर वह क़ौमी नारे भी लगा रहे थे।  नक़्क़ारो की आवाज़ और नारो का शोर तमाम  मैदान को दहला रहे थे। उस पर तमाम तलवारो की आवाज़ और घोड़ो की   हिनहिनाने की आवाज़ और मुस्जाद थी।
  •           मुस्लमान भी कभी कभी अल्लाह हु अकबर का नारा लगा कर साडी आवाज़ों को दबा देते थे। जब मुस्लमान नारा लगाते  ही मुस्लमान बड़े ज़ोर से हमला करते थे गोया वह ताज़ा दम हो जाते थे। उनमे जोश के साथ साथ  ताक़त भी आजा
  • ती थी और वह पहले से भी तेज़ी और फुर्ती से लड़ने लगते थे। उनके तलवारे  इस तेज़ी से काट करने लगती थी की काफिरो का सिथराओ कर डालती थी। उनके परे परे साफ़ करती थी एक दफा तो काफिर घबरा जाते  थे  .
  •            लेकिन सभल कर कुफ्फार भी मुसलमानो पर हमला कर देते थे और उनकी तलवारे भी मुसलमानो को काटने लगती थी  .अलबत्ता यह ज़रूर था   की मुस्लमान कम मारे जाते थे और कुफ्फार ज़्यादा।
  •           जबकि लड़ाई का बड़ा ज़ोर था मुस्लमान काफिरों को और काफिर को पीसपा करने की फ़िक्र  वक़्त मर्जबान  को जोश आगया। वह अपना रिसाला लेकर बढ़ा। इलियास ने देख लिया। उन्होंने अब्दुर्रहमान से कहा “आपने देखा मर्जबान भी हमला करने के क़स्द से चला है.”
  • अब्दुर्रहमान :हमारी निगाह वही है।
  • :इलियास :  आप भी हमला करे।
  • अब्दुर्रहमान :अभी और तवक़्फ़ करो।
  • इलियास : आखिर आप किस वक़्त का इंतज़ार कर रहे है।
  • अब्दुर्रहमान : मै मर्जबान के हमला का असर देखना चाहता हु।
  •            इस अरसा में मर्जबान लड़ने वालो  पहुंच गया। उसने ललकार  कर कहा “बहादुरों! बढ़ो देलिरि  से हमला करो।  अनक़रीब मैदान छोड़ कर भागने वाले है। “
  •             काफिरो ने जब मर्जबान को अपने क़रीब देखा और उसकी आवाज़ सुनी तो उन्हें और जोश आगया।  उन्होंने बड़े ज़ोर से हमला किया। उस हमला में बहुत से मुस्लमान शहीद हो गए और बहुत से ज़ख़्मी हो कर भिन्ना गए।
  •            मुसलमानो ने फिर निगाहे उठा कर देखा। उन्होंने मर्जबान का रिसाला हमला पर तैयार देख कर फिर अल्लाह हु अकबर का नारा लगाया। इस नारे ने उनमे तज़ा जोश भर दिया। वह तलवारो के क़ब्ज़े मज़बूत  पकड़ कर फिर हमला अवर हुए और इस ज़ोर से से हमला किया की कुफ्फार उनके हमला को रोक न सके  .उन्होंने काफिरो को तलवारो की दिहारो पर रख लिया और इस शदीद से जिंदाल क़तल किया की कदमकदम  पर दुश्मनो की लाशो के अंबार लगा दिए।
  •                   यह कैफियत देख कर मर्जबान ने भी मा अपने रिसाला के धावा बोल दिया। मुसलमानो ने बड़े सब्र  व इस्तेकबाल से उसके हमले को भी रोका और जोश में आकर काफिरो की सफो को चीरते हुए उनके बिच  में घुस गए वहा पहुंच कर वह मौत की लड़ाई लड़ने लगे।
  •              अब्दुर्रहमान देख रहे थे। इलियास की भी निगाहे वही थी। अब्दुर्रहमान ने उनकी तरफ देखा जोश व गुस्सा से उनका खून खौल रहा था  . अब्दुर्रहमान ने कहा “अब हमला का वक़्त आगया है तैयार हो जाओ  .
  •              इलियास पहले ही से तैयार थे। इन दोनों ने घोड़ो की बागे ढीली कर दी। उनका रिसाला  भी  तेज़ी से चला। उन्होंने  मुसलमानो के क़रीब पहुंच कर अल्लाह हु अकबर का दिल हिला देने वाला नारा लगा दिया।
  •        मुसलमानो ने निगाहे फेर कर उन्हें देखा। उनके हौसले बढ़ गए। उन्होंने भी अल्लाह हु अकबर का पुर ज़ोर नारा लगाया और निहायत जोश से हमला किया उधर अब्दुर्रहमान इलियास और उनके हमराही ने हमला किया। उन्होंने निहायत  तेज़ी से बेद रेग एक सिरे से काफिरो पर बाढ़ रख दी और उस फुर्ती से उन्हें क़तल   करना शुरू किया की सफे साफ़ कर डाली पहले ही हमला में कई  हज़ार दुश्मनो को खाक  व खून में लुटा दिया।
  •     अब्दुर्रहमान  बड़े जोशीले और निहायत बहादुर थे। उन्होंने  पुर ज़ोर हमला करके काफिरो को खस व खाशाक की तरह काट डाला जिस तरफ हमला करते थे एक दो सवारों को मार डालते थे। जहा लड़ाई  देखते वहा  जा पहुंचे और    मार काट कर दुश्मनो को पीछे धकेल देते है।
  •                इलियास  ने बड़े ज़ोर से हमला किया। उन्होंने जल्दी जल्दी में  काफिरो   क़त्ल  करना शुरू किया। गोया वह तनहा सबको  मार डालना चाहते थे। निहायत फुर्ती से इधर उधर घोडा दौड़ा कर हमले कर रहे थे  और हर हमला पर एक दो सवार  डालते थे। .   वह काफिरो को मरते काटते मर्जबान   की तरफ  बढ़ रहे थे आखिर वह और उनके साथ तक़रीबन पचास सवार सफो को चीरते हुए मर्जबान   के रिसाला पर हमला आवर हुए और उन्होंने इस शिद्दत से हमला किया की जो लोग सामने आये उन्हें उलट दिया   इलियास की तलवारे बड़ी फुर्ती से क़तल कर रही थी उन्होंने कई काफिरो को सफाया करके अल्लाह हु अकबर का नारा लगाया  और बड़े जोश से हमला किया साथ ही उनके हमराही टूट पड़े उन्होंने दूर तक लाशे बिछा दी और आखिरकार मर्जबान के रिसाला खास को उलट दिया। इत्तेफ़ाक़ से मर्जबान की नज़र उनपर पड़ी  वह चौका उसने उन्हें गौर सेदेखा और कहा “अब लड़ना बेकार है यही वह नौजवान है जिसे मैंने  खवाब में देखा था उसने मेरे रिसाले को उलट दिया है। भागो अब अब भागने से ही जान बच जाएगी। “
  •           पहले वह खुद भगा उसके पीछे उसका बचा रिसाला भाग पड़ा। उन्हें भागते हुए देख कर उसका सारा लश्कर  भी भाग खड़ा हुआ। मुसलमानो ने उनका पीछा किया और क़त्ल करना शुरू कर दिया  .मरते काटते लाशे बिछाते  उनके पीछे लगे चले गए। जब काफिर क़िला में जा घुसे तब मुस्लमान वापस लौट आये  .
  •                                            अगला भाग (मसलेहत )
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fatah kabul part 27 Islami Novel shikast
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