Close Menu
  • Home
  • Privacy Policy
  • About us
  • Contact us
  • Terms & Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • Tawaif ( urdu novel) part 24
  • Tawaif (urdu novel) part 23
  • Tawaif (urdu novel) part 22
  • Tawaif ( urdu novel) part 21
  • Tawaif (Urdu Novel) part 20
  • Tawaif (Urdu Novel) part 19
  • Tawaif(Urdu Novel) part 18
  • Tawaif (Urdu Novel) part 17
  • Home
  • Privacy Policy
  • About us
  • Contact us
  • Terms & Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram
novelkistories786.comnovelkistories786.com
Subscribe
Monday, March 16
  • Home
  • Privacy Policy
  • About us
  • Contact us
  • Terms & Conditions
novelkistories786.comnovelkistories786.com
Home»Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel)

FATAH KABUL (ISLAMI TARIKHI NOVEL) PART 23

fatah kabul part 23
umeemasumaiyyafuzailBy umeemasumaiyyafuzailJanuary 26, 2022Updated:January 18, 2026 Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel) No Comments8 Mins Read
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

 

 


राज़ की कुंजी ,,,,,,,,,

 

  • जासूसों का यह काफला तेज़ क़दमी  से वापस लौटा। उन्होंने कश और ज़रनज का दरमियानी इलाक़ा बहुत जल्द तय कर लिया। सलेही तो चाहते थे की इत्मीनान और आराम से सफर करे लेकिन इल्यास की ख्वाहिश थी की या तो ज़मीन की  तनाबे खींच जाये या उनके घोड़े के पर लग जाये और वह जल्द से जल्द बसरा पहुंच जाये। 
  •          इस जल्दी की यह वजह थी की  अब्दुल्लाह ने उन्हें बता  दिया था  सुगमित्रा  की  शादी  अनक़रीब होने वाली है वह  चाहते  थे की अगर सुगमित्रा हक़ीक़त में राबिआ है  तो वह गैर  मुस्लिम से  बियाही जाये। उन्होंने अपना  ख्याल सलेही  ने  ज़ाहिर  कर दिया था इसीलिए वह भी तेज़ी से सफर कर रहे थे। 
  • आखिर यह लोग ज़रनज पहुंचे वहा से उन्होंने अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी और अपने ख्याल व तवक़्क़ो से भी पहले बसरा आ पहुंचे। 
  •         सलेही सीधे इराक के वाली अब्दुल्लाह बिन आमिर की खिदमत में पहुंचे अब्दुल्लाह उन्हें देख बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा “मुझे तुम लोगो का फ़िक्र था। तुम्हारी खैरियत से वापसी की दुआए माँगा करता था। खुदा ने मेरी दुआ क़ुबूल कर्ली और तुम चारो खैर से वापस आगये। यह उनका अहसान है। कहो क्या देखा और सुना। “
  • सलेही : काबुल का राजा ईरान का इलाक़ा अपनी कालमृद में शामिल करना चाहता है। उसने  जंगी तैयरियां  मुकम्मल कर ली है। शहर  दादर के मशहूर धार में उस मुल्क की तमाम हसीन औरतो और माह जबीन लड़कियों ने मिल कर फतह की दुआ मांग ली है। जो खबरे यहाँ सुनी थी वह बिलकुल सच थी। 
  • अब्दुल्लाह : तब तो मुझे तमाम हालात अमीर उल मोमेनीन  को लिख भेजने चाहिए। क्या तुम मदीना मानुर्रा तक जाने की तकलीफ गवारा करोगे ?
  •           मदीना मनव्वरा दारुल खिलाफा था। अमीरुल मूमिनीन ख़लीफ़ा सोएम हज़रात उस्मान गनी वही रहते थे। सलेही ने जवाब दिया “मै ख़ुशी से दियारे रसूल में जाने की तैय्यर हु। 
  • अब्दुल्लाह : मैं तुम्हारा भेजना इसलिए मुनासिब और ज़रूरी ख्याल करता हु की तुम इस मुल्क के हालात अपनी आँखों  से देख आये हो। अमीरुल मूमिनीन जो कुछ दरयाफ्त करंगे उसका जवाब सही तौर पर दे सकोगे। अच्छा  अब तुम जाकर आराम करो। कल अमीरुल मूमिनीन की खिदमत में रवाना हो जाना। इल्यास  !तुम कहो। तुम्हे अपने चाचा का कुछ हाल मालूम हुआ। 
  • इल्यास : जी नहीं। चाचा का कुछ हाल मालूम नहीं हुआ। अलबत्ता राबिआ के मुताल्लिक़ कहा जाता है की  उसे महाराजा काबुल ने अपनी बेटी बना लिया है। मुझे यह भी मालूम हुआ है की राजा उसकी शादी कर देना चाहता है। मैं चाहता हु की जल्द से जल्द काबुल पर लश्कर कशी कर दी जाये ताकि उसकी शादी न हो सके। 
  • अब्दुल्लाह : इंशाल्लाह ऐसा ही होगा। 
  •                यह सब अमीर को सलाम करके चले आए। जब इल्यास अपनी  अम्मी के पास  पहुंचे तो वह उन्हें देख  का  बाग़ बाग़ हो गयी। इल्यास ने उन्हें निहायत अदब से सलाम किया। उन्होंने दुआ देकर उनकी पेशानी  चूमि और कहा “खुदा का हज़ार हज़ार शुक्र व अहसान है की वह तुम्हे खैरियत से वापस लाया। मैं हर नमाज़  के बाद रात को सोते वक़्त दुआ माँगा करती थी। “
  • इल्यास : अम्मी जान! मैं तुम्हारी दुआओ ही के तुफैल में तमाम आफतो से निजात  पा कर वापस आया हु। मुझे  शहर दादर के धार में यहाँ के पेशवा ने शनाख्त कर लिया और क़ैद कर दिया था। 

अम्मी : बेटा! मुझे मुफ़स्सल हालत सुनाओ। 

  •            इल्यास ने तमाम हालात निहायत तफ्सील के साथ ब्यान  किये। उनके अम्मी निहयात  तवज्जह  से सुनती रही  . जब वह  ब्यान कर चुके तो उन्होंने कहा :”मुझे फखर हुआ की मेरे बेटे ने पेशवा के सामने सच कहा और यह ख़ुशी  हुई की  बेटा बाप की तरह बहादुर और निडर है। तुम उस पगली औरत से फिर नहीं मिले। “

इल्यास  : एक दफा मिला था तो वह  हवास में  न थी। दूसरी दफा उसे तलाश किया तो मिली नहीं। 

अम्मी   :तुम ने उस औरत की आंखे देखि थी ?
इल्यास : देखि थी। उसकी आँखों में कहर बायीं चमक मालूम होती थी। अगरचे  उस वक़्त उसकी उम्र  ढल  गयी है और जूनून या बीमारी ने उसे कमज़ोर कर दिया है लेकिन अब भी वह काफी हसीन मालूम होती है। 
अम्मी : मैं यक़ीन से कह सकती हु की वह औरत वही है जो मेरी राबिआ को बहका कर ले गयी थी। लेकिन मैंने तो उसे कोई बद्दुआ नहीं दी। वह पागल कैसे हो गयी। 
इल्यास : खुदा ने उसे सजा दी। मालूम हुआ है उसे महाराजा काबुल ने मुँह मांगी दौलत दी थी। ख्याल यह है की उसके साथियो में से किसी ने उससे दौलत  छीन ली। या तो वह दौलत छीन जाने की वजह से पागल हो गयी। या उसे कोई ऐसी  अज़्ज़ियत पहुंची या दवा खिलाई गयी जिससे  उसका दिमाग ख़राब हो गया। 
अम्मी : मुझे एक ख्याल और है  .उसे राबिआ से बहुत मुहब्बत हो गयी थी। मुमकिन है राजा ने उससे मिलने न दिया हो और उसकी जुदाई में वह पागल हो गयी हो। 
इल्यास :यह बात भी मुमकिन है। 
अम्मी : तुमने सुगमित्रा को क़रीब से देखा था ?
इल्यास : जी हां।  इतने क़रीब से जितने क़रीब आप और मै  बैठे है पहली मर्तबा धार के सेहन में देखा। वह मेरे पास से  गुज़री  .दूसरी मर्तबा बुध ज़ोर के बूतके सामने देखा। वह मेरे पास ही खड़ी थी। तीसरी मर्तबा रात को वह मेरे पास क़ैद  खाना में आयी और पास बैठ कर बाते की। 
अम्मी  : तुमने उसे कैसे पाया ?
इलियास : क्या पूछती हो अम्मी जान !मैंने अपने मुल्क की काबुल के इलाक़े की सैकड़ो नहीं हज़ारो लड़किया देखि है उन लड़कियों में बड़ी ही खूबसूरत  लड़किया नज़र से गुज़र है। लेकिन सुगमित्रा का  हुस्न सबसे बढ़ा चढ़ा था। 
अम्मी : कुछ उसकी शक्ल व सूरत का नक़्शा तो बयान करो। 
इलियास : क्या नक़्शा बयांन करू चेहरा किताबी और बड़ा रोशन था। पेशानी ऊँची और बड़ी दिलफरेब थी। आंखे  बड़ी बड़ी सियाह और चमकदार थी। भवे घनी थी। रुखसार उभरे हुए और बड़े ही दिलकश थे थे। दहन छोटा सा था दांत सफ़ेद मोतियों की लड़िया थे। ठोड़ी बहुत ही प्यारी थी। उसमे छोटा सा गढ़ा था जो बहुत ही भला  मालूम होता था। सर के बाल काले और रेशम से ज़्यदा मुलायम थे। जब वह बात करती थी तो उसके मुँह से फूल झड़ते   मुस्कुराती थी तो आँखों की सामने बिजली सी कूद जाती थी। उसके दोनों लब बारीक और कमान  तरह ख़मीदा  थे। हुस्न  का यह आलम था जैसे चाँद ने अपनी रौशनी उसके चेहरे में भर दी हो। सफ़ेद रंगत पर सुर्खी ग़ालिब थी  .
अम्मी : भई मेरी राबिआ  भी जवानी में ऐसी ही होगी बल्कि कुछ उससे बढ़ कर ही तुमने उसके चेहरे में एक बात नहीं देखि। 
इलियास : क्या ?
अम्मी : उसके दाहने रुखसार पर एक तिल  था। 
         इलियास ख़ुशी से बे खुद होकर चिल्ला उठे  “अम्मी था। खुदा की क़सम मैंने तिल देखा था। निहायत प्यारा मालूम होता था। जब वह क़ैद खाने मेरे सामने बैठी हुई थी तो मैंने उस वक़्त देखा था। मैंने अपने दिल में कहा था खुदा की शान  है उसे और खूबसूरत बनाने के लिए अल्लाह ने उसके रुखसार में तिल रख दिया है। उस वक़्त मुझे  यह ख्याल नहीं आया की राबिआ के भी तिल था। अम्मी जान ! वह ज़रूर राबिआ ही है  . 
अम्मी : मेरे भी यही ख्याल है बेटा। वह तुम्हे नहीं पहचान सकी। शयद इसलिए की पंद्रह साल में बहुत कुछ बदल गए हो। 
इलियास : अम्मी मेरा ख्याल है  वह मुझे क्या खुद को भी नहीं पहचानती। वह ऐसी छोटी उम्र में गयी थी। जब उसे कोई शऊर नहीं था। उन लोगो में रह कर उसने  परवरिश पायी उन्हें जानती और पहचानती है। खुद को और और पिछली  बातो को भूल चुकी है। 
अम्मी : खुदा करे वह  राबिआ ही हो और उसकी शादी न होने पाए। 
इलियास : अमीन !
अम्मी : खुदा करे अमीर उल मूमिनीन लश्कर कशी की इजाज़त देदी। मै भी लश्कर के साथ जाउंगी और अगर खुदा ने मदद  दी तो राबिआ को साथ लेकर आउंगी। 
इलियास : एक बात  मेरी बात समझ में नहीं आयी अम्मी जान। 
अम्मी  : क्या ?
इलियास : जब पेशवा मुझसे बाते कर रहा था और उसने मेरे चाचा राफे का नाम सुना तो उसने खुद ही मेरा नाम बता दिया  .कहने लगा तुम्हारा नाम इलियास है। मुझे हैरत है की वह कैसे मेरा नाम जान गया। 
अम्मी : मालूम होता है बेटा  तुम्हारे चाचा से वाक़िफ़ था। उन्होंने उसे तुम्हारा नाम बता दिया होगा। पेशवा को तुम्हारे चाचा का हाल ज़रूर मालूम है। 
इलियास : यक़ीनन मालूम है खुदा करे अमीर उल मूमिनीन लश्कर कशी की इजाज़त देदे अब मुझे  ख्याल होता है  की पेशवा के हाथ में तमाम राज़ की कुंजी है। वह चाचा से और राबिआ से भी। 
अम्मी : बेटा !अब पहले खाना  खा लो। 
                अम्मी चली गयी और खाना लेकर आयी दोनों खाने लगे। 
 
 
 
                                           अगला भाग (लश्कर इस्लाम का कोच )
 
 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 

 

fatah kabul part 23 raaz ki kunji tareekhi novel
umeemasumaiyyafuzail
  • Website

At NovelKiStories786.com, we believe that every story has a soul and every reader deserves a journey. We are a dedicated platform committed to bringing you the finest collection of novels, short stories, and literary gems from diverse genres.

Keep Reading

fatah kabul (islami tareekhi novel) part 55

fatah kabul (islami tareekhi novel) part 54

fatah kabul (islami tareekhi novel)part 53

fatah kabul (islami tareekhi novel) part 52

fatah kabul ( islami tareekhi novel) part 51

fatah kabul ( isalami tareekhi novel) part 50

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Follow us
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • YouTube
  • Telegram
  • WhatsApp
Recent Posts
  • Tawaif ( urdu novel) part 24 March 5, 2026
  • Tawaif (urdu novel) part 23 March 5, 2026
  • Tawaif (urdu novel) part 22 March 5, 2026
  • Tawaif ( urdu novel) part 21 March 4, 2026
  • Tawaif (Urdu Novel) part 20 March 4, 2026
Archives
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • February 2024
  • January 2024
  • November 2023
  • October 2023
  • September 2023
  • March 2022
  • February 2022
  • January 2022
  • December 2021
Recent Comments
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 3 gam ke badal
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 29
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 29
Recent Posts
  • Tawaif ( urdu novel) part 24
  • Tawaif (urdu novel) part 23
  • Tawaif (urdu novel) part 22
  • Tawaif ( urdu novel) part 21
  • Tawaif (Urdu Novel) part 20
Recent Comments
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 3 gam ke badal
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 29
  • Novelkistories...... on fatah kabul (islami tarikhi novel)part 29

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
© 2026 Novelkistories786. Designed by Skill Forever.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.