मुल्क हिन्द अम्मी ने कहना शुरू किया “बेटा अगले रोज़ राफे एक औरत को लेकर अपने साथ…
गम के बादल। ……. मेरी माँ मुझे ऐसी दास्ताँ सुनाती जा रही थी…
मंगनी। ……. इल्यास खुश होते हुए अपने घर पहुंचे। उनकी अम्मी ने उनको देखा। उनका चेहरा भी ख़ुशी…
काबुल पर लश्कर कशी हमारा नॉवेल उस ज़माने से शुरू होता है जबकि सय्य्दना हज़रात उस्मान गनी रज़ी अल्लाह…
