मुलाक़ात। ….. …
Browsing: Fatah Kabul ( Islamic Historical Novel)
बसत पर ग़लबा …. …
राफे की रवानगी….. …
बाक़िया हैरतनाक हाल ….. …
राफे की दास्तान …. इल्यास ज़ुहर की नमाज़ पढ़ कर कैंप में वापस आये।…
बोद्ध ज़ोर का हश्र …. जब मुसलमानो का दादर पर क़ब्ज़ा पूरी तरह से हो गया तो…
दादर की फतह….. हम्माद राफे जैसे वह पेशवा समझ रहे थे और इल्यास के कहने से…
इंकेशाफ राज़ ( राज़ का ज़ाहिर होना ) मुस्लमान असर के टाइम…
पुरजोश हमला …… जब वह दरबार से निकल कर थोड़ी दूर चले उन्होंने पेशवा की सवारी आती…
सुलह का पैग़ाम ….. दादर वालो को यह मालूम हो गया था की इस मुल्क…
